* कोई बीहड़ का डकैत नही बचा था जिसने यहां घण्टा ना चढ़ाया हो *
जालौन (कुठौंद )थाना क्षेत्र के बीहड़ में यमुना नदी के किनारे ग्राम बरीक़पुरा के पास जालौनी माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इसे बनवाया था, तब इसका नाम जयंती देवी मंदिर था। कालांतर में इसका नाम कब और कैसे बदला, यह किसी को नहीं मालूम। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है
इस मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रृद्धालु दर्शन करने आते हैं। नवरात्र में तो यहां उरई ,औरैया, इटावा, कानपुर देहात, मध्य प्रदेश के भिंड जनपद, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों से भी श्रद्धालू दर्शन के लिए आते है मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस प्राचीन मंदिर में अब तक एक सैकड़ा से अधिक पुजारी नियुक्त हो चुके हैं। पांडवकाल से ही यहां एक अखंड ज्योति जल रही है। पुजारी बराबर इसकी देखरेख करते रहते हैं। यमुना नदी के किनारे बीहड़ में एक ऊंचे टीले पर बना जालौनी माता मंदिर कई किलोमीटर दूर से दिखाई देता है। यहां वर्ष 1985 के बीच कई इनामी दस्यु सरगनाओं ने घंटे चढ़ाए हैं।निर्भय सिंह, कुसमा, फूलनदेवी फक्कड़ बहुत से दस्यु यहां पर आते थे और माता को घंटा चढ़ाते थे जिनका वजन एक कुंतल तक हैँ । सैकड़ों छोटे छोटे घंटे भी हैं जो श्रृद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए हैं।
नवरात्र में पूरे देश से यहां श्रृद्धालुओं की भीड़ लगती है जो यहां जवारे चढ़ाते हैं। नवरात्रि मे यहां पर खासी भीड़ देखने को मिलती हैँ बहुत से समाजसेवी के सहयोग से यहां पर 9 दिनों तक भंडारा चलता रहता हैँ 
