उत्तर प्रदेश साहित्य सभा जनपद जालौन इकाई का गठन
क्रासर- कार्यकरिणी घोषणा के बाद बही काव्य की रसधार
उरई (जालौन)।उत्तर प्रदेश साहित्यसभा के प्राधान संयोजक अंतराष्ट्रीय कवि सर्वेश अस्थाना जी अध्यक्ष बलराम श्रीवास्तव जी सभा के मुख्य समन्वयक गिरधर खरे जी के अनुमोदन पर जिला संयोजक शफीकुर्रहमान कशफ़ी ज़िला अध्यक्ष डॉक्टर अनुज भदौरिया ने ज़िला कार्यकरिणी की घोषणा की राजेन्द्र नगर स्थित सिटी लाइफ स्कूल में शायर असरार अहमद मुक़री और हास्य कवि किरपाराम किरपालु की अध्यक्षता में शिरोमणि सोनी की वाणी वंदना और बुंदेलखण्ड में रफी के नाम से मशहूर मिर्ज़ा साबिर बेग की नाते पाक से शुरू हुई गोष्ठी में सिद्धार्थ त्रिपाठी को सभा का वरिष्टय उपाध्यक्ष और श्रीमती प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम,श्रीमती इंदु विवेक उदैनिया विवेकानंद को उपाध्यक्ष राघवेंद्र कनकने को सचिव/महासचिव श्रीमती शिखा गर्ग को कोषाध्यक्ष श्रीमती शिरोमणि सोनी, श्रीमती गरिमा पाठक को सहसचिव दिव्यांशु दिव्य प्रचार सचिव श्रीमती सीता खरे संगठन सचिव बनाया गया इसके साथ ही सदस्य के रूप में श्रीमती संगीता दुवेदी सुश्री प्रगति मिश्रा अवध नारायण दुवेदी के साथ कोंच कालपी माधौगढ़ रामपुरा जालौन तहसील प्रभारीयो की घोषणा अति शीघ्र की जाएगी इसके काव्यपाठ करते हुए राघवेन्द्र कनकने ने पढ़ा,प्यार वो बेशुमार करता है,जान हमपे निसार करता है,राम जैसे नहीं मगर हमको,कोई दशरथ सा प्यार करता है, इसके बाद शिखा गर्ग ने पढ़ा,दर्द सीने में जगाते हैं मां आंसू तेरे,रोज़ आवाज़ लगाते हैं मां आंसू तेरे,सिद्धार्थ त्रिपाठी ने पढ़ा,लाये भवर में वो हमें साहिल से खींच कर,जिन पर किया यक़ीन हमने आंख मीच कर,दिव्यांशु दिव्य ने पढ़ा,ज़िंदा में इक बार भी पानी नहीं पूछा,बेटे वही तर्पण को कर अब श्राद्ध रहे हैं,शिरोमणि सोनी वीणा ने पढ़ा,बुजुर्गों की दुआओं से घर भी जन्नत हो जाटी है,चरण बस उनके छूने से पूरी मन्नत हो जाती है,किरपाराम किरपालु ने पढ़ा,पूरा घर खाली था फिर भी मैं अब तक न ढूंढ सका,अपने दुख दर्दों को पापा कहां छिपा कर रखते थे,इसके बाद असरार अहमद मुक़री ने पढ़ा,एक दिन जो लड़ बैठा अपनी मैं पड़ोसन से,फिर पुलिस ने की खातिर ला के मेरी थाने में,संचालन कर रहे संयोजक कशफ़ी ने पढ़ा,कलाम मेरा है पर रंग तो दबीर का है,ये मेरे हाथ में कांसा उसी फ़क़ीर का है सभा के अध्यक्ष अनुज भदौरिया ने कहा साहित्यसभा अपने मूल्य उद्देश्यों को पूरी मेहनत से पूरा करेगी उन्हें अमली जामा पहनाएगी हम सब मिल कर जनपद में साहित्य की लौ को कभी मंद नहीं पड़ने देंगे अंत में तांछल सर ने सभी का आभार व्यक्त किया।