लोकेशन =कटनी
इंडियन टीवी न्यूज़ से= शैलेंद्र तिवारी की रिपोर्ट
*कही इतिहास के पन्नों में न दफ़न हो जाए करीतलाई पुरातत्व संग्रहालय, विभाग की उदासीनता से ताले में कैद प्राचीन धरोहर*
*कटनी /करीतलाई* भगवान विष्णु के वाराह अवतार की अद्धभुत एवं कलात्मक प्रतिमा जो कटनी जिला विजयराघवगढ़ ब्लाक अंतर्गत कारीतलाई ग्राम में स्थित है । लगभग डेढ़ हजार वर्ष पूर्व कलचुरी काल में निर्मित उक्त प्रतिमा विश्व के अनूठी प्रतिमाओं में से एक है । लाल बलुआ पत्थर से निर्मित उक्त वाराह प्रतिमा में बेहद कलात्मक ढंग से विभिन्न देवताओं तथा ऋषियों के स्वरूप उकेरे गए हैं । उक्त प्रतिमा के अलावा कारीतलाई में विष्णु के कच्छप अवतार तथा मच्छप अवतार की दो अन्य अद्धभुत प्रतिमाएं भी स्थित हैं । बताया जाता है यहां किसी समय भगवान विष्णु के दशावतार की प्रतिमा भी होती थी । अवश्य ही उक्त प्रतिमा पुरातत्व विभाग द्वारा पूर्व में यहां से रायपुर संग्रहालय ले जाई गई अनेक प्रतिमाओं के साथ ले जाई गई है । रायपुर का संग्रहालय कारीतलाई की सांस्कृतिक विरासत से जगमगा रहा है । किंतु कारीतलाई का संग्रहालय पुरातत्व विभाग का गोदाम बना है और अपमानजनक दशा में पड़ा है । जिला के जनप्रतिनिधियों , प्रशासनिक अधिकारियों , प्रबुद्ध जनों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति कोई रुचि दिखाई नहीं देती । पुरातत्व विभाग द्वारा आज भी करीतलाई के संग्रहालय को केवल गोदाम बनाकर सैकड़ों की संख्या में कलात्मक प्रातिमाओ को ताले में कैद कर रखा गया है । जिन्हे देखने यानि अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने को लोग तरसते हैं । उक्त आरोप वरिष्ट समाज सेवी एवम इतिहासकार राजेंद्र सिंह बघेल ने पुरातत्व विभाग पर लगाए है। उनका कहना है की कारीतलाई में एक संग्रहालय की स्थापना एवं कारीतलाई से रायपुर आदि के संग्रहालय ले जाई गई स्थानीय सांस्कृतिक विरासत वापस कारीतलाई वापस लाए जाने हेतु एक अभियान चलाए जाने की । ताकि यहां की विरासत अपने मूल स्थान पर आ सकें । कारीतलाई में एक समृद्ध पर्यटन केंद्र विकसित हो सके तथा कारीतलाई स्थित पुरातत्व विभाग द्वारा तालों में कैद प्रतिमाएं लोगों के अवलोकनार्थ उपलब्ध हो सकें । जब आंदोलन से राम मंदिर के ताले खुल सकते हैं , चोरी , तस्करी कर विदेश ले जाई गई प्रतिमाएं भारत स्थित अपने मूल स्थान वापस आ सकती हैं तो एक सार्थक प्रयास से कारीतलाई स्थित पुरातत्व विभाग के गोदाम के ताले भी खुल सकते हैं तथा रायपुर जैसे अन्य संग्रहालयों में ले जाई गई स्थानीय प्रतिमाएं भी वापस कारीतलाई आ सकती हैं। प्रसन्नता का विषय है कि विजयराघवगढ़ के हितों के लिए संघर्षरत श्री ब्रह्ममूर्ति तिवारी जी इस दिशा में संवेदनशील एवं प्रयासरत हैं । वे पुरातत्व विभाग के संपर्क में बने रहते हैं । कटनी एवं विजयराघवगढ़ के जनप्रतिनिधियों , प्रबुद्ध जनों तथा मीडिया जगत को भी मिल जुल कर इन प्रयासों को गति देना चाहिए ।