त्रिलोकी नाथ ब्यूरो चीफ गया
इंडियन टीवी न्यूज चैनल
10दिनों तक चलनेवाला प्रयूषण पर्वसभी जैनियो के जीवन के लिए महत्वपूर्ण।
प्रेस विज्ञप्ति
प्रयुष
गया।दिगंबर जैन समाज में पर्वों के राजा कहे जाने वाले महापर्व पर्यूषण पर्व चल रहा है। 10 दिनों तक चलने वाला पर्यूषण पर्व सभी जैनियों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। दशलक्षण के इन दिनों में सभी आत्म कल्याण के मार्ग पर प्रशस्त हो यही प्रयास करेंगे। पर्यूषण पर्व को जैन धर्म में भी सभी पर्वों का राजा माना जाता है। इसलिए बहुत महत्वपूर्ण रखता है क्योंकि यह पर्व महावीर स्वामी के सिद्धांत ‘जियो और जीने दो’ का संदेश देता है। उक्त बातें परम पूज्य श्रमणाचार्य मुनिराज संस्कार सागर जी महाराज ने के परम सानिध्य में चल रहे दशलक्षण पर्व की तीसरे दिन कही। उन्होंने तीसरे दिन की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां क्रोध रूपी अग्नि है वहां सारे गुण समाप्त हो जाते हैं, जहां उसके अंदर सरलता, सहजता, शिष्टता होता है वही प्रेम भाव जन्म लेते हैं। यदि जीव के अंदर क्षमा भाव आया तो उसे सभी जगह मान सम्मान मिलते हैं। अगर जीव के अंदर क्रोध होगा तो उसके अंदर ईर्ष्या और द्वेष की भावना पैदा होगी। मुनिराज ने कहा कि मन में किसी के प्रति ईर्ष्या और द्वेष की भावना नहीं रखनी चाहिए।यही पर्युषण पर्व के 10 दिनों का मूलउद्देश्य है। जैनियों को इसका पालन दिनचर्या में अवश्य करना चाहिए। रमना रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम मार्धव की पूजा श्रद्धा एवं भक्ति भाव से की गई। जैन धर्मावलंबियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर भगवान पार्श्वनाथ जी का महामस्ताभिषेक किया। विधि विधान के तहत समाज की महिलाओं ने सामूहिक रूप से दशलक्षण विधान का पाठ कर जैन परंपरानुसार शांति धारा, नित्य नियम, पूजन प्रवचन तत्वार्थ सूत्र का वाचन, प्रतिक्रमण कर विशेष पूजा अभ्यर्थना की। इस बीच महिलाओं ने बादाम, नारियल, अक्षत, लौंग, इलाइची सहित कई अन्य सूखे मेवे अर्पित कर अनुष्ठान किया। कई श्रद्धालुओं ने ध्यान मग्न होकर दशलक्षण विधान का जाप कर अपने आराध्य देवता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया। विधान के दौरान पूरा मंदिर परिसर जैन मंत्रोंच्चारण से गूंजायमान हो रहा है। मौके पर राजकुमारी गंगवाल, संतोषी गंगवाल, मोनिका अजमेरा, जैन समाज के अध्यक्ष अजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष विकास पाटनी, कोषाध्यक्ष हर्ष काला, मंत्री हेमंत पाटनी, सह मंत्री अर्पित पाटनी, सत्येंद्र अजमेरा, अमूल्य अजमेरा,मधु कांत काला सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग इस धार्मिक कार्य में तन-मन’ धन से सहयोग कर रहे हैं।