शहडोल विकाश विश्वकर्मा
बुढ़ार के ग्राम पंचायत नेमुहा में जय दुर्गे स्वीट्स और भी फर्मो के नाम लाखो रुपए के फर्जी बिल लग रहे। जबकि जय दुर्गे स्वीट्स फर्म की रजिस्ट्रेशन नहीं होने के बावजूद बिल ग्राम पंचायत में लगाया जा रहा हैं। आप को बता दे कि पंचायत के मिलीभगत से यह सह कार्य जारी हैं। जिस फर्म का बिल सचिव द्वारा लगाया जा रहा हैं। वो सब फर्जी बिल हैं। साथ ही जय दुर्गे स्वीट्स के नाम से 90 किलो बूदी जिसकी कीमत 14,400 रुपये लगाई गई हैं। और भी कई बिल सचिव सहायक सचिव के द्वारा लगाया गया हैं। ग्राम पंचायत में सचिव के द्वारा केवल कच्चे बिल के माध्यम से सरपंच-सचिव द्वारा राशि निकालकर सप्लायर्स को फिक्स कमीशन देकर पैसे निकाल रहे हैं। और निर्माण कार्य को घटिया सामग्री से कार्य किया जा रहा है। सप्लायर्स भी कमीशन के लालच में शासन को टैक्स का चूना लगाकर लाखों रुपए का लेनदेन कर रहे हैं। पंचायतों में चल रहे इस फर्जीवाड़े की जांच की जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है। इधर जनपद पंचायत बुढ़ार के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा भी बिलों के भुगतान में अनदेखी कर किसी तरह की आपित्त ना लेने से शासन को हर माह टैक्स के रूप में मिलने वाली राजस्व की हानि हो रही है।
पंचायतों में फर्जी बिलों की प्रक्रिया को सही बताकर निर्माण कार्यों का भुगतान किया जा रहा है। पंचायतें निर्माण कार्य के बाद ऐसे सप्लायर को बिलों का भुगतान कर रहे हैं । जिनके पास जीएसटी नंबर तो हैं। पर क्या वो विभाग को केवल अंधकार में रख रहे हैं। जिससे कि उनका काम आसान हो जाए। और विभाग के अधिकारी आँखों पर काले चश्मे पहन कर मस्त मगन से कुछ दिखा, ऐसा लोगों को और सरकार को बता रहे हैं। आपको बता दे कि इनकी वहज से जीएसटी न देना आम जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ रही हैं।
*पंचायत में नहीं रहते उपस्थिति सरपंच सचिव*
ग्रामीणों के बताया गया कि सरपंच सचिव सहायक सचिव कभी भी समय से नहीं पहुँचते, और कभी कभी तो पंचायत ही नहीं आते। ग्रामीणों का यह भी आरोप हैं कि जब भी ग्राम पंचायत में ग्राम सभा का आयोजन होना रहता हैं तो सचिव उपस्थित ही नहीं रहते, साथ ही अगर किसी कदर आ गये तो ग्राम सभा मे बिना किसी चर्चा के कोरे कागज में सिग्नेचर लेकर उड़न छू हो जाते हैं। जबकि इसकी शिकायत को लेकर जनपद से लेकर जिला थ किया गया हैं। लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई हैं। बस इसी बात का फायदा उठाकर सचिव सहायक सचिव और सरपंच अपनी मनमर्जी करने से इतराते नहीं ।
*नेमुहा की नैया डगमगाई कैसे होगी ग्रामीणों का नैया पार*
ग्राम पंचायत नेमुहा में अपने आप को यह प्रदर्शित करता हैं कि वो हर कार्य मे सबसे आगे हैं। और यह सच भी हैं लेकिन भ्रष्टाचार में आपको जानकारी नहीं होगी आप कोई भी कार्य ले लो इसमें मास्टर रोल में फर्जी तरीके से अपने लोगे के नाम डालकर पैसा कमाने का जरिए बना लिए हैं। और सचिव द्वारा इस कार्य को करने में बादशाह साबित हो रहे हैं। क्योंकि उनके दुनिया का रूप रंग भली भांति पता हैं। इनके ऊपर जनपद और जिले में बैठे अधिकारी तक कार्यवाही करने से भी इतराते हैं। सप्लायर्स के नाम से विभाग को तो चुना लगा ही रह हैं। साथ ही साथ उनके द्वारा उक्त बिल में गिट्टी, रेत , सृमेंट तक के ऐसे फर्जी बिल दे रहे हैं। जिसकी पात्रता में वह नहीं आते। हमारे पास कई पंचायतों में निर्माण कार्यों के नाम किए गए भुगतान के ऐसे बिल मौजूद हैं जिनमें लाखों रुपए का भुगतान सप्लायर्स के खातों में किया गया है। पंचायतों में जिस तरह से फर्जी बिलों के माध्यम से राशि निकाली जा रही है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंचायतों में होने वाला ऑडिट किस तरह से हो रहा है और ऐसे भुगतानों पर ऑडिट में भी कोई आपित्त नहीं ली जा रही है। बुढ़ार जनपद पंचायत के अंतर्गत ऐसे कई मामले हैं जिनमें सरपंच और सचिवों ने राशि निकालने के बाद भी निर्माण कार्य नहीं कराया। जय दुर्गा स्वीट्स जैतपुर रोड बुढ़ार, और प्रकाश चंद गुप्ता के लग रहे ग्राम पंचायत में बिल पर ईट का भी जीएसटी बिल लगाकर पैसा लिया जा रहा हैं। जो कि शासन के साथ लुकाछिपी का खेल खेला जा रहा हैं। न जाने इस तरह की कई बिल ग्राम पंचायतो में लगा कर अच्छी खाशी मोटी कमाई का जरिया बनाये हुए हैं।