वाकई में किसी ने क्या खूब कहा..कश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया,मेरी तलाश का भी तो जरिया बदल गया!ना शक्ल ही बदली न ही बदला मेरा किरदार,बस अब युवाओं के देखने का नजरिया बदल गया!
एक वक्त था जब कभी भी देशभक्ति के गाने सुनते थे तो मन में ऊर्जा फैल जाती थी, दिल में जोश भर जाता था,देश पर गर्व होता था!आज कुछ राज्यों और शहरों की बात होती है!आज की युवा पीढ़ी, पढ़- लिख जाने के बाद विदेश जाना चाहती है क्योंकि वह देश की सड़कों पर धूल-मिट्टी बुरी तरह से लगने वाले जाम, भ्रष्टाचार, प्रदूषण, निम्न स्तर की राजनीतिक बयानबाजी, जातियों और धर्म के झगड़ों से निराश है!जब आज की युवा पीढ़ी देखती है कि कुछ लोगों के अहम को संतुष्ट करने के लिए किस तरह दिलों को बदला जा रहा हैं!असल समस्याओं पर ध्यान न देकर फालतू के बखेड़े खड़े किए जाते हैं!तो उसे निराशा होती है!जहां देश के उज्जवल भविष्य के लिए शिक्षा ओर स्वास्थ्य पर पैसा खर्च होना चाहिए पर ऐसा न करके सिर्फ अपनी अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए लाखों लोगों को मुफ्त खाने व पहनने की आदत डाली जा रही है! कुछ नेता अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रदूषण और जाम से निजात दिलाने की बात नहीं करते! आकर्षण पैदा करने वाले नारे महज नारा बन कर न रह जाएं इसके लिए हर देशवासी को अच्छी शिक्षा,अच्छी सेहत, प्रदूषण और भ्रष्टाचार रहित जिंदगी देनी होगी!!बस एक बात कहूंगा कि कुछ नेताओं के कारण लोगो का अंदाज बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई,कुछ नेताओं ने हिंदू मुस्लिम करके इंसानियत को वीरान कर दिया!
! रिपोर्ट रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़