नीम हकीम झोलाछाप के चक्कर में पड़कर दिग्भ्रमित होता युवा..
ऐसे तथाकथित फर्जी चिकित्सकों पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल..
किसी भी शहर में निकल जाइए, सड़क किनारे दीवारों पर ‘गुप्तरोग का शर्तिया इलाज’ वाले विज्ञापन और तंबू वाले अस्पताल जरूर मिलेंगे। इन तंबुओं के बाहर पोस्टरों पर तरह-तरह की शक्ति बढ़ाने और खो गई शक्तियों को पाने के रामबाण इलाज का दावा किया गया होता है। इनके लिए अन्य नाम है ‘झोलाछाप डाक्टर’। अंग्रेजी में उन्हें ‘क्वैक’ कहा जाता है। इनसे जुड़ा मुहावरा ‘नीम-हकीम खतरा-ए-जान’ भी आपके ध्यान में आया होगा।दरअसल हमारे यहां सेहत को लेकर तो कमोबेश जागरूकता पाई जाती है, लेकिन कई बार लगता है कि इस मसले को ज्यादातर लोग टुकड़ों में बांट कर देखते हैं। मसलन, समाज में लोग कुछ बीमारियों को लेकर डाक्टर के पास जाने से हिचकते हैं, दाएं-बाएं हल खोजते हैं। कोई देख न रहा हो, किसी को पता न चल जाए,चुपचाप इलाज हो जाए,इसी संकोच का दोहन किया जाता है नीम-हकीमों द्वारा संचालित तथाकथित क्लीनिकों में।जबकि यौन-स्वास्थ्य भी हमारी समूची सेहत का ही एक जरूरी हिस्सा है। यौन अंग भी शरीर के सामान्य हिस्से ही हैं। यह विषय भी जीवन का नैसर्गिक और स्वस्थ भाग हैं, पर भारतीय समाज में इससे जुड़ी बातों को गलत चीज की तरह बरता जाता है। यौन रोगों को लेकर काल्पनिक डर बना दिए गए हैं और इन्हें लेकर बड़ी गोपनीयता अमल में लाई जाती है। इससे संबंधित रोगों को ‘गुप्त रोग’ का नाम देना दिग्भ्रमित करना है। गोपनीयता के चलते लोगों को सही और जरूरी जानकारी नहीं मिलती। यह अभाव गलतफहमियों को जन्म देता है।नीम-हकीम और बाबा कहे जाने वाले लोग आम जन के बीच इसी अज्ञानता, भ्रांतियां और इसके इलाज के नाम पर अनेक अंधविश्वासों का फायदा उठाते हैं। वे शारीरिक विकास की सामान्य दशाओं को भी बीमारी बता कर लोगों को ठगते हैं। अब इंटरनेट तक नीम-हकीमों का जाल इस कदर फैल रहा है कि निजता के नाम पर न कोई किसी पर भरोसा कर रहा, न रख रहा। इंटरनेट इस्तेमाल करते समय इन विज्ञापनों के तुरंत दिखने का मतलब हुआ कि नीम-हकीम जानते हैं कि पढ़े-लिखे कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले भी भी गुप्त तरीके से दवाएं पाना चाहते हैं। अधिक गहराई से सोचें तो इसमें एक और पन्ना खुलता है। यानी पढ़े-लिखे लोग सड़क किनारे उन तक नहीं आ सकते तो वे ही कंप्यूटर की खिड़की से उनके भीतर झांक लेंगे। क्या इन जाली ‘रहनुमाओ’ को खुद इलाज की आवश्यकता नहीं है?
रिपोर्ट रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़