नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
ब्यूरो हजारीबाग
बिहार में शराबबंदी की तरह ही झारखंड में पान-मसाला पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है.
प्रदेश में अब गुटखा (पानमसाला) खाना और बेचना दोनों अपराध माना जाएगा. इसको लेकर विभागीय सचिव अजय कुमार सिंह ने आदेश जारी कर दिया है.
झारखंड में पान-मसाला पर पूर्ण प्रतिबंध: स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की बड़ी पहल
हजारीबाग/रांची: झारखंड सरकार ने प्रदेश में पान-मसाला (गुटखा) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। अब राज्य में न तो गुटखा बेचा जा सकेगा और न ही इसका सेवन किया जा सकेगा। सरकार के इस कदम को बिहार में लागू शराबबंदी के समान माना जा रहा है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने यह फैसला कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया है। राज्य में गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों के कारण होने वाले कैंसर और अन्य बीमारियों को रोकने के लिए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।
सरकारी आदेश और #पुलिस की सख्ती
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने इस प्रतिबंध को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आदेश के अनुसार, पूरे झारखंड में गुटखा और पान-मसाला का उत्पादन, बिक्री और सेवन अब कानूनी अपराध माना जाएगा। अगर कोई व्यक्ति इन प्रतिबंधित पदार्थों की बिक्री या सेवन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस फैसले को कड़ाई से लागू करेगी। उन्होंने कहा कि पान-मसाला और गुटखा के कारण झारखंड में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और सरकार राज्य के नागरिकों की सेहत से कोई समझौता नहीं करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री की चेतावनी: जनता को कैंसर से बचाना प्राथमिकता
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस फैसले की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि सरकार ने यह प्रतिबंध इसलिए लगाया है ताकि राज्य के लोग तंबाकू से होने वाली घातक बीमारियों से बच सकें। हाल ही में कैंसर दिवस के मौके पर मंत्री ने इस प्रतिबंध की घोषणा की थी, और अब इसे आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “मैं झारखंड के लोगों को कैंसर से मरने नहीं दूंगा। गुटखा और पान-मसाला सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि धीमा जहर है, जो लोगों की जान ले रहा है। हम इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
स्वास्थ्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पान-मसाला के नाम पर गुटखा की खुलेआम बिक्री हो रही थी, जिससे प्रतिबंध लगाना आवश्यक हो गया था। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
राज्य में नशीली दवाओं पर भी होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री ने सिर्फ गुटखा ही नहीं, बल्कि प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री पर भी कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में आरसीएच कैंपस, नामकुम में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टोर्स में प्रतिबंधित नशीले सिरप और स्टेरॉयड की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
उन्होंने सभी सिविल सर्जनों और ड्रग इंस्पेक्टरों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनके क्षेत्र में प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री होती पाई गई, तो उन्हें भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।
क्या झारखंड में भी होगी बिहार जैसी सख्ती?
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद वहां कानून व्यवस्था को बनाए रखने में सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। झारखंड में गुटखा बैन के बाद भी इसी तरह की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुटखा और पान-मसाला की तस्करी को रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे। इसके अलावा, लोगों को तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी होगा।
जनता की प्रतिक्रिया और आगे की राह
सरकार के इस फैसले पर जनता की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे जनहित में लिया गया सही निर्णय बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह प्रतिबंध काले बाजार को बढ़ावा दे सकता है।
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि गुटखा और पान-मसाला के सेवन से मुंह का कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, और इस पर रोक लगाना जरूरी था।
झारखंड सरकार अब इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए अभियान चलाएगी, ताकि लोग गुटखा और पान-मसाला छोड़ने के लिए प्रेरित हों। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसी योजनाओं पर भी विचार कर रहा है, जिससे लोग गुटखा की लत से छुटकारा पा सकें।झारखंड में पान-मसाला और गुटखा पर प्रतिबंध लगाना एक ऐतिहासिक कदम है, जो राज्य के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि, इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को सख्ती के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाने होंगे। अब देखना होगा कि इस फैसले का राज्य में कितना प्रभाव पड़ता है और क्या झारखंड सरकार इसे बिहार की शराबबंदी की तरह सफल बना पाती है या नहीं।