उरई(जालौन):
यदि सनातनी अधिक संख्या में होंगे, तो हमारी संस्कृति और धर्म की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी – देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
उरई, भागवत आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए सनातन बोर्ड का बनना जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के मंदिरों पर सरकार का आधिपत्य है, उसे सरकार के आधिपत्य से मुक्त कराना है। आजकल हिंदू परिवारों में बच्चों को सनातन धर्म की शिक्षा नहीं दी जाती, लेकिन सोशल मीडिया पर स्वयं को धार्मिक दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उन्होंने आग्रह किया कि हर सनातनी को अपने परिवार में धर्म की शिक्षा देनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ी रहें। प्रत्येक सनातनी को तुलसी माता की सेवा अवश्य करनी चाहिए,
हर सनातनी के माथे पर तिलक, हाथ में कलावा, गले में कंठी और मुख पर भगवान का नाम होना चाहिए। यही सनातन की वास्तविक पहचान है, जो व्यक्ति को धर्म के प्रति समर्पित और गौरवान्वित महसूस कराती है।गौसेवा सनातन धर्म का महत्वपूर्ण अंग है। गाय को माता का स्थान दिया गया है, और उसकी सेवा करने से पुण्य प्राप्त होता है, प्रत्येक सनातनी के घर में तीन-चार बाल गोपाल अवश्य होने चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इससे बच्चों में धार्मिक संस्कार भी विकसित होते हैं।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख
उरई-जालौन)उ.प्र.