सुहागिन महिलाओं का पर्व दशा माता वृत की रही नगर में धूम महिलाओं ने पूजन कर मांगी नगर की समृद्धि की कामना।
मनीष भट्ट ताल:- नगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में आज का दिन दशा माता के नाम रहा। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता का पूजन किया जाता है मान्यता है कि इस वृत को करने से दशो दिशाओं से आपके घर में धन धान्य, सुख शांति और समृद्धि की वृद्धि होती है। वृत होली के दसवें दिन मनाया जाता है इस संबंध में कुछ विशेष जानकारी देते हुवे गामोठ पंडित प्रेम शंकर शर्मा ने बताया कि दशा माता के दिन पूजन के बाद एक समय भोजन किया जाता है कुछ महिलाएं बिना नमक का उपवास भी रखती है सुहागिन महिलाएं इस वृत को जीवन पर्यंत रखती हैं आज के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी का वास होता है पंडित जी द्वारा पीपल के चारों और कच्चा सूत लपेटा जाता है उसके बाद महिलाएं पंचोपचार से पूजा करती है और कच्चे दूध और जल से सिंचा जाता है और वृक्ष की अपनी क्षमता अनुसार परिक्रमा करती। पंडित जी राजा नल और रानी दमयंती की कहानी सुनते है पूजन के बाद पीपल के वृक्ष की छाल को अपने घर लाकर पूजा स्थल या तिजोरी में रखती है घर में प्रवेश करने के पूर्व मुख्य द्वार पर हल्दी और कुंकु के छापे लगाते है मान्यता यह भी है कि दशा माता का डोरा अपने गले में धारण करती और नव विवाहित महिलाएं प्रथम बार इस वृत की शुरुआत ससुराल से करती है।