कांग्रेस की रीढ़ साबित हो सकते हैं मनोज आर्य निष्ठावान संगठनात्मक दृष्टिसे
पत्रकार राजेंद्र प्रसाद यादव चिचोली
बैतूल। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष को लेकर दावेदारी का दौर शुरू हो गया है। संगठन में कई युवा चेहरे है लेकिन जिला कांग्रेस को यदि कोई निष्ठावान, परिपक्व, संगठनात्मक दृष्टि से दूरदर्शी और जमीनी कार्यकर्ता के रूप में दिशा दे सकता है, तो वह नाम सिर्फ और सिर्फ मनोज आर्य चिचोली का हो सकता है। इसके पीछे एक दो नहीं बल्कि सैकड़ो वजह सामने आ रही है। कांग्रेस के इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाए तो पिछले तीन दशक से अधिक का संघर्ष, त्याग और समर्पण की मिसाल जनमानस की सेवा, संगठन के लिए जीवन का एक-एक क्षण समर्पित, और हर आंदोलन में सबसे आगे रहने वालों में मनोज आर्य का नाम शामिल है। कांग्रेस पार्टी के लिए जिसने निष्ठा की मिसाल कायम की, जनहित के हर मुद्दे पर सड़क से सदन तक आवाज बुलंद की, संगठन को गांव-गांव तक फैलाया और कार्यकर्ताओं को परिवार बनाया वही नाम आज बैतूल जिले की कांग्रेस की धड़कन बनकर उभरा है।
मनोज आर्य सिर्फ एक कार्यकर्ता नहीं, वह कांग्रेस के विचारों की चलती-फिरती तस्वीर हैं। विद्यार्थी जीवन से लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक की लंबी यात्रा में उन्होंने हर भूमिका में खुद को खरा साबित किया है। छात्र राजनीति में एनएसयूआई के नगर उपाध्यक्ष के रूप में चिचोली में कॉलेज खुलवाने के लिए चक्का जाम कर आंदोलन किया, मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुँचाई। चिचोली स्टेडियम के लिए भूख हड़ताल की। जब-जब जनता की ज़रूरतें अनदेखी हुईं, तब-तब मनोज आर्य संघर्ष की अगली पंक्ति में खड़े दिखाई दिए।
– संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाया
सेवादल के ब्लॉक अध्यक्ष, फिर जिला अध्यक्ष बनकर उन्होंने संगठन को गांव-गांव पहुंचाया। प्रशिक्षण शिविरों से लेकर अधिवेशनों तक हजारों कार्यकर्ताओं को जोड़ा, प्रशिक्षित किया और कांग्रेस की विचारधारा की गहराई से पहचान करवाई। प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के सचिव रहते हुए उन्होंने विदिशा, भिंड, छिंदवाड़ा और भोपाल में संगठनात्मक मजबूती का वह काम किया, जिसे आज भी कार्यकर्ता उदाहरण के तौर पर दोहराते हैं।
किसान, मजदूर, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, महिला – हर वर्ग की लड़ाई को अपना संघर्ष बना लिया। चाहे भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ चक्का जाम हो या बिजली, पानी, सड़क, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लड़ाई, हर जगह मनोज आर्य अपनी बेबाक शैली और जनसमर्थन के साथ खड़े रहे।
कंगना रनौत के विवादित बयान के खिलाफ सैकड़ों ट्रैक्टरों की रैली निकालकर चिचोली से सारणी और बैतूल तक एकजुटता की वो तस्वीर पेश की, जिसे आज भी लोग कांग्रेस का स्वाभिमान मानते हैं। सारणी अस्पताल की दुर्दशा पर आंदोलन करते हुए जब प्रशासन ने पुलिस प्रकरण दर्ज कराए, तब मनोज आर्य पीछे नहीं हटे वो और अधिक ताकत से जनता के बीच उतरे।
– कलार समाज को एक माला में पिरोया
सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान किसी राजनेता से कम नहीं। कलार समाज को एक माला में पिरोकर उन्होंने सामाजिक एकजुटता का जो महायज्ञ रचा, वह बैतूल जिले के सामाजिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। देश के प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति में हुए आयोजनों, भव्य यात्राओं और हजारों युवाओं के साथ हुए समाज सम्मेलनों ने यह प्रमाणित किया कि मनोज आर्य राजनीतिक क्षेत्र के सशक्त नेतृत्वकर्ता हैं, सामाजिक संगठनों को दिशा देने वाले प्रेरणा पुरुष भी हैं।
आज कांग्रेस को ऐसे ही नेतृत्व की आवश्यकता है जो न झुके, न थके, न रुके। जो संगठन को केवल दिशा नहीं, जीवन भी दे। जो सड़कों से लेकर मंचों तक जनता की आवाज बने, और कार्यकर्ताओं के लिए छाया की तरह खड़ा हो। मनोज आर्य में यह सभी गुण मौजूद हैं। वह एक ऐसा नाम हैं, जो पार्टी के लिए गर्व का विषय भी हैं और भविष्य की मजबूती की गारंटी भी। आज जरूरत है उस नेतृत्व की जो अपने जीवन की सारी पूंजी कांग्रेस में लगा चुका हो, जिसकी रगों में विचारधारा बहती हो, और जिसकी हर सांस में जनसेवा और संगठन की शक्ति हो। और यही पहचान है मनोज आर्य की।
– कोरोना काल में जन सेवा करते हुए परिवार के पांच सदस्यों को खोया
कोरोना काल की भयावह परिस्थितियों में जब लोग अपने घरों में कैद थे, उस कठिन समय में मनोज आर्य ने मानव सेवा समिति चिचोली के माध्यम से जरूरतमंदो को फल और भोजन वितरित कर मानवता की मिसाल पेश की। इस सेवा कार्य के दौरान वे कोविड पॉजिटिव हो गए। इनके साथ ही परिवार में कोविड फैलने से उन्होंने परिवार के पांच सदस्यों को खो दिया। फिर भी वे रुके नहीं, 2023 में कांग्रेस की सत्ता के लिए पाथाखेड़ा में आयोजित जनाक्रोश रैली में मंच का संचालन करते समय उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया। इसके बाद भी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटते हुए हरदा-टिमरनी…