बी.एससी गणित में सामूहिक फेल पर एबीवीपी का विरोध कुलपति के नाम प्राचार्य को सौपा ज्ञापन
महेंद्र पाण्डेय
खुरई | महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर द्वारा घोषित बी.एससी. गणित तृतीय वर्ष के हालिया परीक्षा परिणामों में डिग्री कॉलेज खुरई के लगभग 80% छात्र-छात्राओं को एक ही विषय में सामूहिक रूप से अनुतीर्ण कर दिया गया है। यह स्थिति न केवल शैक्षणिक दृष्टि से गंभीर प्रश्न खड़े करती है, बल्कि इससे प्रभावित छात्र-छात्राएँ स्नातकोत्तर में प्रवेश नहीं ले पा रहीं तथा सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं, जिनमें स्नातक अनिवार्य योग्यता है, में बैठने से भी वंचित हो गई हैं। इसी गंभीर प्रकरण को लेकर आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद – खुरई इकाई द्वारा कुलपति महोदया के नाम एक सशक्त ज्ञापन शासकीय महाविद्यालय खुरई की प्राचार्य डॉ. वंदना गोस्वामी को सौंपा गया। नगर मंत्री लोकेश राज ने कहा:विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बार-बार परिणामों में गड़बड़ियाँ की जा रही हैं। इस बार बी.एससी. गणित में लगभग 80 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को एक साथ असफल करना शिक्षा व्यवस्था के साथ क्रूर मज़ाक है। इससे विद्यार्थियों की मेहनत, मनोबल और भविष्य तीनों पर कठोर आघात हुआ है।हम यह मांग करते हैं कि छात्रों को उनका न्यायपूर्ण अधिकार दिया जाए। मूल्यांकन में हुई गंभीर त्रुटियों को सुधारते हुए पुनर्मूल्यांकन हो तथा शिक्षा प्रणाली में स्थायी पारदर्शिता लाई जाए। एबीवीपी सदैव छात्रहित में संघर्षशील रही है और यदि आवश्यक हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन की राह भी अपनाई जाएगी।” ज्ञापन में परिषद द्वारा उठाई गई मुख्य माँगें इस प्रकार हैं उत्तरपुस्तिकाओं का निष्पक्ष व शीघ्र पुनर्मूल्यांकन कराया जाए
कक्षा के इतने बड़े हिस्से का एक ही विषय में अनुतीर्ण होना मूल्यांकन की पारदर्शिता पर गम्भीर प्रश्न खड़े करता है। परिषद की माँग है कि सभी छात्र-छात्राओं की उत्तरपुस्तिकाओं की पुनः जाँच निष्पक्षता के साथ हो।छात्रों को उत्तरपुस्तिकाएं दिखाने की सुविधा मिले
छात्रों को अधिकार हो कि वे अपनी उत्तरपुस्तिकाएं स्वयं देख सकें, ताकि वे मूल्यांकन में हुई संभावित त्रुटियों को पहचान सकें। इससे न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि संस्थान के प्रति छात्रों का विश्वास भी बना रहेगा।. मूल्यांकन प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार हों विश्वविद्यालय स्तर पर मूल्यांकन प्रणाली की गहन समीक्षा हो तथा उत्तरदायित्व तय करने के साथ तकनीकी एवं प्रशासनिक सुधार किए जाएँ। पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित हो। परिणामों में लगातार देखी जा रही अनियमितताओं पर शीघ्र रोक लगे पिछले कुछ वर्षों से विश्वविद्यालय द्वारा जारी परिणामों में बार-बार त्रुटियाँ, विलंब, अंक असमानता जैसे मामले सामने आ रहे हैं। अब यह स्थिति छात्रों के भविष्य के लिए एक स्थायी संकट बन चुकी है।
छात्रों को उनकी मेहनत और उत्तर लेखन गुणवत्ता के आधार पर अंक दिए जाएँकिसी छात्र का भविष्य मात्र जाँचकर्ता की लापरवाही या त्रुटिपूर्ण प्रणाली की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। विद्यार्थियों को उनके ज्ञान और श्रम के अनुसार अंक मिलने चाहिए। यह ज्ञापन शासकीय महाविद्यालय खुरई में सौंपा गया, जहाँ छात्रों के हित में यह एक महत्वपूर्ण और साहसिक कदम माना जा रहा है। परिषद ने चेताया है कि यदि समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख रूप से नगर सह मंत्री साकेत सिंह, महाविद्यालय प्रमुख विनीत अहिरवार, कृष्णांश सोनी, मयंक बघेल, नितेश सिलापरी, शैलेन्द्र विश्वकर्मा, एवं परिषद के अनेक सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।