उरई(जालौन):
जनपद को मिली हाईटेक नर्सरी की सौगात:
सितंबर से शुरू होगा उत्पादन, किसानों को मिलेंगे प्रमाणित उन्नतशील पौधे:
जनपद को आज एक बड़ी सौगात मिली है। डकोर विकास खंड के बोहदपुरा क्षेत्र में निर्मित हाईटेक नर्सरी का आज जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस नर्सरी से सितंबर माह से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, जिससे किसानों को प्रमाणित और उन्नतशील पौधे मिल सकेंगे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता को तत्काल बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली कनेक्शन होते ही नर्सरी में उत्पादन कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने इस नर्सरी को जनपद के किसानों के लिए एक बड़ी सौगात बताया। उन्होंने कहा कि अब किसानों को बाजार से महंगे और अप्रमाणिक पौधे नहीं खरीदने पड़ेंगे। यहां से मिलने वाले पौधे न केवल प्रमाणित और रोगमुक्त होंगे, बल्कि वे बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उपज भी सुनिश्चित करेंगे। यह हाईटेक नर्सरी वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है, जहां बैंगन, टमाटर, मिर्च, फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, लौकी, कद्दू, करेला और खीरा जैसी विभिन्न प्रकार की सब्जियों के पौधे भूमि रहित तकनीक से तैयार किए जाएंगे। इस तकनीक से पौधे एक समान ऊंचाई वाले, स्वस्थ और रोगमुक्त होते हैं, जिससे किसानों को अधिक उपज और आर्थिक लाभ मिलेगा। जिला उद्यान अधिकारी परवेज खान ने बताया कि बोहदपुरा स्थित इस हाईटेक नर्सरी का निर्माण राजदीप एग्रीप्रोडक्ट्स प्रा. लि. द्वारा 1.09 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। किसानों के लिए पौधों की खरीद बेहद किफायती होगी। यदि वे विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए बीजों से पौधे चाहते हैं, तो उन्हें बीज लागत के साथ एक रुपया प्रति पौधा अतिरिक्त देना होगा। वहीं, यदि किसान अपने स्वयं के बीज लाते हैं, तो उन्हें प्रति पौधा केवल एक रुपया देना होगा। उत्पादन के लिए तीन प्रमुख आधुनिक चैंबर बनाए गए हैं। जिसमें सीड सोइंग चैंबर: यहां ऑटोमैटिक मशीन द्वारा एक घंटे में दस हजार बीजों की बुवाई की जा सकती है। अंकुरण चैंबर : 500 वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस चैंबर में एक लाख पौधों को एक साथ तैयार किया जा सकता है। यह चैंबर पॉली कार्बोनेट संरचना, बूमर सिंचाई प्रणाली और ऑटोमैटिक फैन-पैड कूलिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो तापमान और नमी को नियंत्रित रखती हैं।
हाइडिनिंग चैंबर : अंकुरित पौधों को यहां 15 से 20 दिनों तक रखा जाता है, ताकि वे खेतों में रोपण के लिए तैयार हो सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि अब तक जनपद में केवल कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से सीमित स्तर पर पौध उत्पादन होता था। लेकिन इस अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी के निर्माण से न केवल जनपद सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि भविष्य में सब्जियों के निर्यात की संभावनायें भी मजबूत होंगी। यह पहल निश्चित रूप से जनपद के किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख
उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश