जवाबलखनादौन, 22 जुलाई 2025: मध्य प्रदेश के लखनादौन में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां राकेश पंद्रे नामक एक व्यक्ति अपने तबादला आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हुए आज भी लखनादौन तहसील न्यायालय में सक्रिय भूमिका निभा रहा है यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है पंद्रे का हाल ही में आदेगांव से लखनादौन तहसील में स्थानांतरण किया गया था लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह अभी भी पुरानी जगह पर जमे हुए हैं यह स्थिति न केवल स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ा रही है, बल्कि लगातार 11 वर्षों तक एक ही स्थान पर पंद्रे के जमे रहने को लेकर विभागीय मिलीभगत की गहरी आशंका को भी जन्म दे रही है। यह महज एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे कुछ खास लोगों को नियमों से ऊपर रखा जाता है, जिससे आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर से विश्वास उठ रहा है
इस पूरे प्रकरण की परतें संतोष कुमार गोल्हानी द्वारा लगाई गई एक RTI सूचना का अधिकार याचिका से और भी खुल गई हैं गोल्हानी का आरोप है कि उन्हें RTI के जवाब में अधूरी और गोलमोल जानकारी दी गई है उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि राकेश पंद्रे के PGDCA (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन से संबंधित कोई भी दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। यह जानकारी का अभाव न केवल पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है बल्कि पंद्रे की योग्यता और पद पर बने रहने की वैधता पर भी गंभीर संदेह पैदा करता है RTI अधिनियम जो नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, का इस तरह से उल्लंघन होना बेहद निराशाजनक है जब एक नागरिक अपनी वैध जानकारी मांगता है और उसे अधूरा या गलत जवाब मिलता है तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही पर हमला है गोल्हानी का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर बार टालमटोल का ही सामना करना पड़ा
इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक तंत्र में गहरी जड़ें जमा चुकी कुछ अनियमिताएं हैं जिन्हें तत्काल दूर करने की आवश्यकता है एक ओर जहां सरकार स्थानांतरण नीति को प्रभावी बनाने और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले इन दावों की पोल खोलते हैं राकेश पंद्रे का स्थानांतरण के बावजूद लखनादौन में सक्रिय रहना, और उस पर RTI में भी पूरी जानकारी न मिलना, यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, और कुछ प्रभावशाली लोग अपनी पहुंच का दुरुपयोग कर रहे हैं यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं यदि ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह अन्य सरकारी कर्मचारियों के मनोबल को गिरा सकता है और नियमों का पालन न करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकता है। इससे अंतत आम जनता को न्याय मिलने में देरी होगी और उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे इस मामले पर उच्च अधिकारियों को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और इसकी गहन और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए केवल राकेश पंद्रे ही नहीं बल्कि उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिन्होंने इस अवैध गतिविधियों में सहयोग किया या जानबूझकर आंखें मूंद लीं यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक शुचिता, ईमानदारी और जनता के विश्वास का प्रश्न है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियमों का पालन सभी के लिए समान हो चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो पारदर्शिता और जवाबदेही ही एक सुशासन की आधारशिला है, और इन सिद्धांतों को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहिए जनता यह जानने की हकदार है कि राकेश पंद्रे जैसे लोग कैसे प्रशासनिक व्यवस्था में सेंध लगा रहे हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई न होने से जनता में असंतोष और आक्रोश बढ़ सकता है। यह समय है कि प्रशासन अपनी कार्यशैली में सुधार लाए और कानून के शासन को सर्वोच्च रखे क्या आप इस मामले में विस्तृत जांच की मांग या आंदोलन के संभावित विकल्पों पर चर्चा करना चाहेंगे
इंडियन न्यूज रिपोर्टर संतोष गोल्हानी
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