कसरावद। बलकवाड़ा थाने का मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। एक छात्र की मौत के बाद न्याय की उम्मीद में थाने पहुंचे परिजनों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने पूरे पुलिस विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि थाना प्रभारी रितेश यादव ने न केवल मृतक परिवार को रिपोर्ट दर्ज करने से रोका, बल्कि उनसे धक्का-मुक्की कर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, उन्होंने खुलेआम आरोपी का पक्ष लेते हुए कहा- “रिपोर्ट से क्या होगा? आधे घंटे में उसकी जमानत हो जाएगी।”
इस कथन ने पीड़ित परिवार और मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया। जिस पुलिस अधिकारी से न्याय और सुरक्षा की अपेक्षा थी, वहीं अपराधी के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया। लोगों का कहना है कि थाना प्रभारी का रवैया एक संरक्षक अधिकारी का नहीं बल्कि विलेन का था, जो पीड़ितों को डराकर चुप कराना चाहता था।
48 घंटे तक जब परिवार को न्याय नहीं मिला, तो वे एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ एसडीएम सत्येन्द्र बैरवा के कार्यालय पहुंचे और धरना दिया। आंदोलन बढ़ता देख एसडीओपी श्वेता शुक्ला ने मामले की कमान संभाली। उन्होंने तुरंत बलकवाड़ा थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करवाई और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया।
एसडीओपी ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी और चाहे कोई भी दोषी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही थाना प्रभारी के आचरण पर भी विभागीय जांच बिठाई जायेगी।
इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी ही अपराधियों का संरक्षक बन जाए और पीड़ितों को प्रताड़ित करने लगे, तो न्याय के लिए लोगों को सड़क पर उतरना ही पड़ता है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने एसडीओपी को न्याय की देवी बताते हुए धन्यवाद दिया और थाना प्रभारी पर कठोर कार्रवाई की मांग की।