पवित्र नगरी मंडलेश्वर में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस की हालिया ताबड़तोड़ कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां नवागत पुलिस अधीक्षक के आने के बाद पुलिस ने सक्रियता का दिखावा किया है, वहीं दूसरी ओर पिछले कई महीनों से निष्क्रिय रहने और मामूली कार्रवाई करने पर थाना प्रभारी दीपक यादव की कार्यप्रणाली संदेह में है।
विधायक की नाराजगी क्यों नहीं हुई कार्रवाई
मुख्यमंत्री के कड़े आदेशों के बावजूद, मंडलेश्वर में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था। क्षेत्रीय विधायक राजकुमार मेव ने भी कई बार मीडिया के सामने पुलिस और आबकारी विभाग को निष्क्रियता पर नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को भी लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था, जिससे यह धारणा बन गई थी कि पुलिस इस अवैध कारोबार को जानबूझकर नजर अंदाज कर रही है।
नवागत पुलिस अधीक्षक श्री वर्मा अब सवाल यह है कि जब विधायक जैसे जनप्रतिनिधि भी शिकायत कर रहे थे, तो धाना प्रभारी ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की?
मामूली कार्रवाई पर उठे सवाल
अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा कर रही मंडलेश्वर पुलिस ने तीन लोगों पर मामला दर्ज कर कुल 12.3 बल्क लीटर शराब जब्त की है। हालांकि, इस छोटी कार्रवाई के बाद पुलिस पर बड़े शराब ठेकेदारों को बचाने की कोशिश करने का आरोप लग रहा है। थाना प्रभारी यादव ने बताया कि तीन अलग-अलग मामलों में कुल 78740 की देशी और विदेशी शराब जब्त की गई है और तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 34 (1) के तहत
मामला दर्ज किया गया है। बड़े नेटवर्क पर चुप्पी
यह कार्रवाई तब हुई जब नए पुलिस अधीक्षक ने खरगोन का पदभार ग्रहण किया जबकि पूरी पवित्र नगरी में अवैध शराब का कारोबार घड़ल्ले से चल रहा है। जब्त की गई शराब की मात्रा बेहद कम है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस केवल छोटे-मोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई कर रही है, जबकि बड़े शराब माफिया और ठेकेदारों पर हाथ डालने से बच रही है। थाना प्रभारी दीपक यादव ने बताया कि जब्त की गई शराब के बैच नंबरों से पता लगाया जा रहा है कि यह कहां से लाई गई थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के बाद सभी दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, पुलिस का यह बयान आम लोगों को भी संतुष्ट नहीं कर पा रहा है। उनका मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब की बिक्री बिना किसी बड़े नेटवर्क के संभव नहीं है। इस तरह की छोटी कार्रवाई करके पुलिस सिर्फ अपनी खानापूर्ति कर रही है और असली गुनहगारों को
बचाने की कोशिश कर रही है।
मंडलेश्वर थाने में पिछले कई महीनों से स्थायी थाना प्रभारी का पद रिक्त है और दीपक यादव प्रभारी के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे है। एक बड़े थाना क्षेत्र और धार्मिक नगरी होने के नाते, यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में एक प्रभारी के भरोसे काम चलाना पुलिसिंग की गुणवत्ता और मनोबल को प्रभावित करता है। कई लोगों का मानना है कि प्रभारी होने के कारण शायद वे बड़े माफियाओं पर कार्रवाई करने में संकोच कर रहे है।
अब जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को सहित मीडिया के लोगो को उम्मीद है कि नए पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा जल्द ही मंडलेश्वर थाने में एक स्थायी थाना प्रभारी की नियुक्ति करेंगे। एक स्थायी नेतृत्व न केवल पुलिसिंग को मजबूत करेगा, बल्कि अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी ढंग से लगाम लगा पाएगा। अब देखना यह होगा कि नवागत पुलिस अधीक्षक श्री वर्मा इस महत्वपूर्ण रिक्त पद पर कब तक स्थाई थाना प्रभारी की नियुक्ति करते है। या मंडलेश्वर थाना यू ही प्रभारी के भरोसे चलता रहेगा।
INDIN TV NEWS खरगोन जिला से मंडलेश्वर से राजा गोखले ब्यूरो चीफ की खास रिपोर्ट