नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग।
हजारीबाग: खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि झारखंड में बाहरी ताकतें “खतियानी को खतियानियों से लड़वाने” का षड्यंत्र रच रही हैं। उन्होंने कहा कि यह वही बात है जो 25 साल पहले खतियानी परिवार के संस्थापक स्वर्गीय ए.डी. नदीम ने कही थी, कि जब बाहरी ताकतें मजबूत होंगी तो झारखंड के लोग आपस में लड़ेंगे।
हकीम ने दावा किया कि यह कथन अब सच साबित होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में जनता को नेताओं के मुखौटे समझने में देर लगती है। उन्होंने माननीय जयराम महतो पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भाषा, संस्कृति और खतियान के नाम पर आंदोलन कर जनता के सामने आए, लेकिन अब उनका मुखौटा उजागर हो गया है। हकीम के अनुसार, कुर्मी और आदिवासी समुदायों के बीच चल रहे संघर्ष में कथित तौर पर आजसू (AJSU) के नेता सुदेश महतो पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आजसू झारखंड की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है और कुर्मी समाज के लिए आदिवासी दर्जे की मांग का समर्थन कर रही है।
मोहम्मद हकीम ने कहा कि जयराम महतो का आजसू के समर्थन में दिया गया वक्तव्य उनके राजनीतिक चरित्र को उजागर करता है, जबकि झारखंड के मूल आदिवासी इस मांग के विरोध में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुद्धिमानी दिखाते हुए कुर्मियों की मांग के विरोध में कदम उठाए हैं। हकीम ने कहा कि झारखंड की जनता अब भोली-भाली नहीं है और वह आजसू और जयराम महतो के छलावे को अच्छी तरह समझती है।
प्रेस विज्ञप्ति में सभी खतियानियों से अपील की गई है कि वे आपस में लड़ने के बजाय एकजुट होकर स्थानीय नीति को लागू करवाने के लिए पूरा समर्थन दें। हकीम ने कहा कि “झारखंडी कौन, जिसके पास हो खतियान” की परिभाषा जब तक सरकार तय नहीं करती, तब तक इस तरह के आंदोलन चलते रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर झारखंड के आदिवासी, मूलवासी और सदान एकजुट नहीं हुए तो बाहरी ताकतें राज्य को लूटकर कंगाल कर देंगी।