ब्यूरो चीफ सुंदरलाल जिला
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय 14 जीटीसी सुबाथू में भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस गौरवशाली परंपराओं और आधुनिक राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। समूचा विद्यालय परिसर तिरंगे की आभा और देशभक्ति के गीतों से गुंजायमान रहा, जिससे वातावरण में एक नई ऊर्जा और संकल्प का संचार हुआ। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती आशा चौधरी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुआ। ध्वजारोहण के उपरांत राष्ट्रगान की गूँज के बीच तिरंगे को सलामी दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह के हृदय में राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम को और अधिक गहरा कर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्या श्रीमती आशा चौधरी ने विद्यार्थियों और उपस्थित अभिभावकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने अपने ओजस्वी वक्तव्य में भारतीय संविधान की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों को संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों, न्याय, स्वतंत्रता और समानता जैसे सिद्धांतों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि एक सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से सजग रहना होगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के सत्र ने समारोह में चार चाँद लगा दिए। विद्यार्थियों ने अपनी विविध और आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक संपन्नता का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर देशभक्ति गीतों और लोक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “ऑपरेशन सिंदूर” विषय पर आधारित एक विशेष नृत्य-नाटिका रही। इस प्रस्तुति ने न केवल भारतीय सशस्त्र बलों के बलिदान और वीरता को जीवंत किया, बल्कि यह सशक्त संदेश भी दिया कि भारत अपनी शांति और अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी बाहरी चुनौती का मुँहतोड़ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। इस मार्मिक और साहसी प्रदर्शन ने दर्शकों के बीच जोश भर दिया और सभी ने खड़े होकर तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
समारोह का समापन हर्षोल्लास के साथ हुआ, जहाँ प्राचार्या द्वारा सभी छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों के बीच मिठाइयाँ वितरित की गईं। इस भव्य आयोजन ने न केवल गणतंत्र के उत्सव को मनाया, बल्कि भावी पीढ़ी के मन में देशप्रेम, अनुशासन और राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना को एक नई ऊँचाई प्रदान की। यह दिन विद्यालय के इतिहास में वीरता और संकल्प के एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।