*डिंडौरी… म.प्र सहायक आयुक्त कार्यालय में वेतन कटौती व जांचों का नायक खलनायक कौन* ?

डिंडोरी जिले का सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग कार्यालय प्रदेश का ऐसा इकलौता कार्यालय है जिसे राज का कब्रिस्तान भी कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा l
इसके साथ ही साथ यह ऐसा भी कार्यालय है जहां जो हो रहा है ऐसा शायद ही देश में कहीं होता होगा या हुआ होगा l इस कार्यालय में पदस्थ पूर्व सहायक आयुक्त अमर सिंह उईके के समय में किए गए स्थाई कर्मी आदेश, नियमितीकरण आदेश, शिक्षा कर्मी वर्ग 2,शिक्षा कर्मी वर्ग 3, के नियुक्ति आदेश अनुकंपा नियुक्ति आदेश,कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्ति आदेश, कंप्यूटर ऑपरेटर नियमितीकरण आदेश आदि आदेशों को जांच कर रिपोर्ट देने हेतु कलेक्टर झा द्वारा जांच कराने जांच टीम बनाई गई थी l
कलेक्टर द्वारा किए गए जांच आदेश को जांच टीम के साथ-साथ कलेक्टर स्वयं भी भूल गए या उस पर पर्दा डाल दिया क्या यह तो अधिकारी ही बता सकते हैं l कलेक्टर द्वारा बनाई गई जांच टीम में अपर कलेक्टर लेखा अधिकारी सहायक आयुक्त आदि थे लेकिन इन तमाम अधिकारियों को कलेक्टर का वह आदेश अब याद भी नहीं रहा l उपरोक्त आदेशो के संबंध में जानकार बताते हैं कि यदि इसकी जांच हो जाती और उसके राज खुल जाते तो हमारा दावा है।
कि दर्जनों लोग सलाखों के पीछे होते l सहायक आयुक्त ने यहां भी कमाई का जरिया ढूंढ लिया l जांच तो नहीं हुई न जांच किया ना जांच करने दिया हां अपने यहां पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर जो वर्षों से विभाग में दैनिक वेतन भोगी की दर पर काम कर रहे हैं ऐसे कंप्यूटर ऑपरेटरों को मिलने वाले वेतन में श्रीमान जी द्वारा कटौती कर दी गई है l
कार्यालय में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों में लखनलाल पाटिल, पीयूष द्विवेदी ,पवन नंदेहा ,रूप लाल यादव, सुरेश उसराठे तथा अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर जो जिले में के अन्य विद्यालयों में काम कर रहे ऐसे दर्जनों ऑपरेटरों को मिलने वाले वेतन में कटौती कर दी गई l कलेक्टर के जांच के आदेश के पूर्व इन कंप्यूटर ऑपरेटरों को 12235 रुपए मासिक की दर से भुगतान मिलता था l किंतु अब इन्हें केवल 5000 रुपए मासिक वेतन मिल रहा है l वेतन कटौती के संबंध में विभाग का कोई भी कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है
वही कंप्यूटर ऑपरेटर इसके लिए एक ऑपरेटर साथी वा सहायक आयुक्त को दोषी मानते हैं l इस संबंध में सहायक आयुक्त से पूछे जाने पर श्रीमान जी कहते हैं कि यह सब कंप्यूटर ऑपरेटर जांच के दायरे में हैं यदि यह जांच के दायरे में है तो जांच क्यों नहीं हुई और यदि हुई तो उसका परिणाम क्यों नहीं निकला , और यदि ऐसा नहीं है तो इनका भुगतान कम का क्यों कर दिया गया
,और यदि यह दोषी हैं तो उन्हें विभाग से बाहर क्यों नहीं किया गया, इनमें एक कंप्यूटर ऑपरेटर तो सरेराह कहता है कि मैं खड़े-खड़े मर्सिडीज खरीद सकता हूं l इसके बाद भी यह कंप्यूटर ऑपरेटर इस विभाग में 5000 रुपए की नौकरी क्यों कर रहा है l पीयूष द्विवेदी नामक कंप्यूटर ऑपरेटर साहब का खासम खास बना हुआ हैl
और यह कार्यालय उसके हिसाब से चल रहा है या चलता है कहा जाए तो भी गलत नहीं होगा l कार्यालय सूत्र बताते हैं कि यह श्रीमान जी जिले के स्कूलों छात्रावासों में सामग्री सप्लाई भी करते हैं l जो साहब वह भी ऐसे साहब का खासम खास हो जिसे विभागीय कारनामों का पुराना अनुभव हो या मास्टर डिग्री हो के रहते किस तरह की सप्लाई करते होंगे यह समझा जा सकता है l
कुल मिलाकर इस कार्यालय का माई बाप यदि कोई है तो वह है यही कंप्यूटर ऑपरेटर है l सहाबा और कंप्यूटर ऑपरेटर की जुगलबंदी का राज भी शीघ्र जनता के सामने होगा साहब का चहेता यह कंप्यूटर ऑपरेटर 5000 सरिता मासिक मैं तो क्या यह श्रीमान जी तो इस कार्यालय में फ्री में भी यहां सर्विस दे सकता है l इसे कौन से वेतन से कुछ लेना देना है पर बाकी लोगों को जो यहां से मिलने वाले वेतन से ही l
अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं l आखिर इनके वेतन कम करने का आlदेश देने वाला वह भी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का वेतन कम करने का आदेश देने वाला वह मजिस्ट्रेट या मुख्यमंत्री कौन है ? या सहायक आयुक्त स्वयं ही नायक और खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं? बहरहाल जो भी हो बरसों से इस कार्यालय में काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर इन दिनों कार्यालय में काम करके खून के आंसू रो रहे हैं l
इंडियन टीवी न्यूज़ संवाददाता मो0 सफर ज़िला डिंडोरी मध्य प्रदेश