अकरम खान पटेल की रिपोर्ट
बैतूल।
ताप्ती रोड पर तीन आदिवासी किसानों के साथ कथित मारपीट के मामले ने बैतूल में बड़ा सामाजिक और राजनीतिक रूप ले लिया। सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में सोमवार को विशाल रैली और धरना-प्रदर्शन आयोजित कर बजरंग दल के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज प्रकरण में गंभीर धाराएं जोड़ने, नामजद एफआईआर दर्ज करने, पीड़ितों को मुआवजा देने तथा आदिवासी क्षेत्रों में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
रैली की शुरुआत पड़ापेन ठाना सदर बैतूल से हुई, जो अंबेडकर चौक, कोठी बाजार बस स्टैंड, लल्ली चौक और कलेक्ट्रेट मार्ग होते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची। यहां बड़ी संख्या में एकत्रित आदिवासी समाज के लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया और बजरंग दल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपियों पर दर्ज प्रकरण में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि 31 मई को ग्राम खेड़ी के आगे ताप्ती रोड पर आदिवासी किसान सुगना धुर्वे, चौवलू धुर्वे और टन्टू के साथ बजरंग दल के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से बेरहमी से मारपीट की गई। आरोप है कि किसानों से बैल खरीदी की पर्ची छीनकर फाड़ दी गई, उनके साथ लाठी, डंडों, हांस पाइप एवं अन्य सामग्री से हमला किया गया तथा पैसे भी लूट लिए गए। घटना में सुगना धुर्वे का हाथ फ्रैक्चर होने, सीने एवं पैरों में गंभीर चोटें आने का उल्लेख ज्ञापन में किया गया है।
सर्व आदिवासी समाज ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले में साधारण धाराएं नहीं गंभीर मारपीट, लूट, जान से मारने की धमकी, अड़बाजी सहित अन्य कठोर धाराएं जोड़ी जाएं। साथ ही अज्ञात आरोपियों के स्थान पर नामजद एफआईआर दर्ज कर सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में आरोप लगाया कि बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम यादव सहित नितिन घोटे, आकाश राठौर, कुनाल पाटिल, अंश तायवाडे, ललित यादव, राहुल जोशी तथा अन्य लोगों के नाम एफआईआर में शामिल करने की मांग भी की गई। आदिवासी समाज का आरोप है कि आदिवासी समुदाय के लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की घटना सामने आई थी। इसे दूसरी बड़ी घटना बताते हुए समाज ने आदिवासी क्षेत्रों में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की मांग रखी।
प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित किसानों को उचित आर्थिक मुआवजा देने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग भी की। इस दौरान आदिवासी समाज के वरिष्ठ दिलीप धुर्वे, कांग्रेस जिला अध्यक्ष निलय डागा, कांग्रेस नेता रामू टेकाम, पूर्व विधायक धरमू सिंह, जयस अध्यक्ष संदीप कुमार धुर्वे, जितेंद्र सिंह इवने, सोनू धुर्वे, जामवंत सिंह कुमरे, पंकज अतुलकर, डॉ. रमेश काकोडिया, रामचरण इरपाचे, इंजीनियर राजा धुर्वे, ऋतिक परते, शंभू धुर्वे, मुन्नालाल वाडिवा, सुंदरलाल उइके, डोमा सिंह कुमरे, सुरेंद्र कुमरे, अंतू सिंह मर्सकोले, अनिल उइके, हेमंत सरियाम, संजय मावसकर सहित सैकड़ों आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।