दुर्गा उत्सव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक संपन्न
Ravi jhariya
State Reporter (M.P.)
मध्यप्रदेश/जबलपुर -: आगामी दुर्गा उत्सव को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने पुलिस कंट्रोल रूम में टेंट, ट्रेस, लाइट एवं साउंड संचालकों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़, अपर कलेक्टर रविशंकर राय, शैलेंद्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी, एमपीबी के एसई श्री संजय अरोरा तथा संबंधित विभागों के अधिकारी, टेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं कारोबारी उपस्थित रहे।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़ ने कहा कि रात 10:30 बजे के बाद साउंड बंद करना होगा और निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना होगा। पुलिस स्टाफ साउंड मीटर एप के माध्यम से ध्वनि स्तर की जांच करेगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साउंड संचालकों से कहा कि वे अधिक तेज आवाज या देर रात तक साउंड चलाने के किसी भी दबाव में न आएं। ऐसी स्थिति में तत्काल 112 या संबंधित पुलिस अधिकारी को सूचना दें। प्रत्येक पंडाल के लिए पुलिस का एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और उसका मोबाइल नंबर संबंधितों को उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने के लिए आपत्तिजनक, अशोभनीय या विवाद उत्पन्न करने वाले गीत नहीं बजाने की समझाइश दी। साउंड वाहनों में आवश्यकता से अधिक एंगल और अतिरिक्त साउंड बॉक्स नहीं लगाने के भी निर्देश दिए गए। ताकि वाहनों की चौड़ाई बढ़ने से दुर्घटना की स्थिति निर्मित न हो। साउंड वाहनों में वायरलेस माइक रखने तथा बच्चों और बुजुर्गों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्यधिक तेज बास से बचने की सलाह दी गई।
बैठक में डीजे संचालकों के बीच तेज आवाज की प्रतियोगिता और भारी पुरस्कार राशि जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा नहीं देने की अपील की गई। बाहर से आने वाले डीजे समूहों की जानकारी प्रशासन को पहले से देने के निर्देश दिए गए। साउंड वाहन एवं टेंट व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को नशे की हालत में काम नहीं करने की भी सख्त हिदायत दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्थिति में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों का रास्ता बाधित नहीं होना चाहिए। पुलिस गश्त के दौरान यदि साउंड बंद कराया जाता है, तो उसके बाद दोबारा साउंड शुरू करने के लिए दबाव बनाने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में पिछले वर्षों की दुर्घटनाओं तथा हाल में सामने आई लापरवाही से संबंधित वीडियो भी दिखाए गए। इनमें खुले और कटे-फटे विद्युत तार, खराब इंसुलेशन तथा मेटल स्ट्रक्चर के संपर्क में आने वाले तारों की स्थिति दिखाई गई। अधिकारियों ने कहा कि पंडालों में ट्रेस एवं अन्य मेटल स्ट्रक्चर का उपयोग होने के कारण विद्युत तारों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। पंडालों में प्रतिदिन विद्युत व्यवस्था की जांच करने के निर्देश भी दिए गए। शाम को लाइटिंग शुरू करने से पहले आयोजन समिति के जिम्मेदार व्यक्ति टेस्टर से वायरिंग और स्ट्रक्चर की जांच करें। कहीं भी करंट पाए जाने पर तत्काल सुधार कराया जाए।
बैठक में संबंधित आयोजकों एवं संचालकों पंडाल और ट्रेस की संरचना को मजबूती और सुरक्षा की दृष्टि से बनाने के लिए निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बड़े पंडालों में भीड़ को देखते हुए एक से अधिक प्रवेश और निकास मार्ग रखने के निर्देश दिए, ताकि भीड़ की स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा सके। उन्होंने कहा कि पंडाल, स्टेज और अन्य अस्थायी संरचनाओं की स्थापना इस प्रकार से की जाए कि एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड तथा आमजन के आवागमन में कोई बाधा न आए तथा यातायात भी प्रभावित न हो।
बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आयोजन समितियों, साउंड, लाइट, टेंट और मूर्ति व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों से सुरक्षा संबंधी नोटिस, बांड और शपथपत्र भरवाने की जानकारी दी गई। सभी संबंधितों से इन नियमों का केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करने का आग्रह किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि दुर्गा उत्सव को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी सभी की सामूहिक है। प्रशासन और पुलिस की टीमें पंडालों का औचक निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की भी जांच करेंगी।