ब्यूरो चीफ सुंदरलाल जिला सोलन हिमाचल प्रदेश
देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपनी धार्मिक आस्था, समृद्ध संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां नवरात्रों के पावन अवसर पर मंदिरों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी संस्थानों में भी धार्मिक आयोजनों और भंडारों की विशेष परंपरा रही है। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग मंडल कसौली के अंतर्गत परवाणू उपमंडल के कार्यालय प्रांगण में नवरात्रों के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।
भंडारे में धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे की सुंदर झलक देखने को मिली। लोगों ने उत्साहपूर्वक भंडारे में भाग लिया। इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक हैं, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश भी देते हैं।
हिमाचल प्रदेश को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता। प्रदेश के लगभग प्रत्येक गांव में देवी-देवताओं के मंदिर और देवस्थल देखने को मिलते हैं। यहां के लोगों की देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था है। विशेषकर नवरात्रों के दौरान पूरे प्रदेश में धार्मिक वातावरण बना रहता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जाता है।
प्रदेश में धार्मिक आयोजनों की विशेषता यह भी है कि केवल मंदिर परिसरों में ही नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग, पुलिस थानों और अन्य सरकारी कार्यालयों में भी नवरात्रों के अवसर पर भंडारे आयोजित किए जाते हैं। इससे कर्मचारियों और आम जनता के बीच आपसी सद्भाव तथा सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलता है।
हिमाचल की संस्कृति में भंडारे को सेवा और पुण्य का कार्य माना जाता है। यहां बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के लोग एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। यही देवभूमि की धार्मिक और सामाजिक एकता की पहचान है।
परवाणू में आयोजित इस भंडारे ने एक बार फिर साबित किया कि हिमाचल की धार्मिक परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही हैं। ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे, मानव सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।