भीतर के अंधकार को मिटाकर सद्गुणों का दीप जलाना ही सच्ची दीपावली……..राजयोगिनी बीके अनामिका बहन
**परसपुर सेवा केंद्र पर दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित, दीप प्रज्वलित कर विश्व शांति की कामना की………
परसपुर गोण्डा।। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के परसपुर सेवा केंद्र पर दीपोत्सव पर्व के उपलक्ष्य में एक दिन पूर्व विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान भाई-बहनों ने दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाईं तथा दीदी जी को चैतन्य लक्ष्मी के रूप में सम्मानित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनामिका बहिन ने कहा कि दीपोत्सव केवल बाहरी दीपक जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान और सद्गुणों का प्रकाश फैलाने का अवसर है। दीपक आत्मा का प्रतीक है। जिस प्रकार दीपक में तेल, बाती और लौ होती है, उसी प्रकार आत्मा में मन, बुद्धि और संस्कार होते हैं। परमात्मा के ज्ञान से ही जीवन में सच्चा प्रकाश आता है।
उन्होंने कहा कि अंधकार का अर्थ केवल रात का अंधेरा नहीं, बल्कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार हैं। इन्हीं के कारण परिवार में अशांति और समाज में तनाव उत्पन्न होता है। सच्ची दीपावली तभी सार्थक होगी, जब हम इन विकारों को त्यागकर पवित्रता, शांति, प्रेम और सहनशीलता को जीवन में अपनाएंगे।
लक्ष्मी पूजन का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक लक्ष्मी धन-संपत्ति नहीं, बल्कि श्रेष्ठ गुणों की पूंजी है। मधुर वाणी, धैर्य, संतोष और दूसरों को सुख देने की भावना ही सच्ची लक्ष्मी है। उन्होंने उपस्थित लोगों को संकल्प दिलाया कि इस दीपावली पर किसी को दुख नहीं पहुंचाएंगे, क्रोध से दूर रहेंगे, मधुर वाणी बोलेंगे और आपसी संबंधों में प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखेंगे।
इस अवसर पर डॉ. सुरेश चंद्र तिवारी, राधेश्याम मिश्रा, राघवेंद्र पांडेय, हनुमान प्रसाद शर्मा, रामेश्वर प्रसाद मिश्रा, अनूप सिंह, मिथिलेश सिंह, बबिता सिंह, आशा सिंह, उमा, सुषमा, मन्ना, ममता, पूनम, रागिनी, पिंकी, रमा और मालती सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने दीप प्रज्वलित कर विश्व शांति की कामना की तथा प्रसाद ग्रहण किया।
