नल जल योजना’ में नल तो है, मगर जल नहीं… अधिकारी और ठेकेदारों के लापरवाही की सजा भुगत रहे ग्रामीण, बूंद-बूंद पानी को मोहताज।
रिपोर्टर विजय कुमार यादव
उमरिया: उफरी में इन दिनों गर्मी की तपिश से लोगों का बुरा हाल है. ऐसे में पानी की बूंद बूंद के लिए ग्रामीण मोहताज हैं. एक माह चला सफलाई दूसरे माह से बंद ठेकेदार द्वारा आपरेटर का पेमेंट नहीं दिया गया। सरकार की महत्वपूर्ण नल जल योजना सिर्फ कागजों में इस जिले में संचालित हो रही है. उमरिया जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां के ग्रामीण आज भी आधुनिकता के युग में बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. कहने को प्रशासन ने कागजों पर नल जल योजना (nal jal yojana) की एक तस्वीर उभरी हुई है, लेकिन हकीकत ठीक इसके विपरीत अपनी कहानी बयां कर रही है.
यहां नल की टोटी में से ना तो हवा बाहर आ रही है और ना ही पानी. आलम ये है कि ग्रामीणों को पानी के लिए रोजाना दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, उमरिया जिले में गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए पीएचई विभाग (PHE Department) द्वारा नल जल योजना (nal jal yojana) संचालित की जा रह है. जिसके लिए करोड़ों रुपये की लागत से पीएचई विभाग ने कई गांवों को चिन्हांकित करते हुए यहां पाइप लाइन बिछाकर वाटर टैंक लगा दिया. लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी आज ये नल जल योजना सिर्फ शो पीस बनकर उमरिया जिले के उफरी गांव में सुशोभित हो रही है.
लापरवाही अधिकारी-ठेकेदार की, भुगत रहे ग्रामीण
जब भी नल जल योजना (nal jal yojana) की बात की जाती है तो मन में एक सुंदर तस्वीर शुद्ध पेयजल की निकलकर सामने आती है. लेकिन उमरिया जिले में आधिकारी और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण आज यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गई है. ग्रामीण रोजाना शुद्ध पेयजल के लिए कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं. रोजमर्रा की जरूरतों के लिए या तो ये लोग ढोड़ी के गंदे पानी का उपयोग करते हैं या फिर किसी कुएं से पानी लेकर अपने घर आते हैं. यहां पानी भरने के लिए लंबी कतारें ये बताती हैं कि सूरजपुर जिले में नल जल योजना होने के बावजूद जल संकट किस कदर गहराया हुआ है. बच्चों से लेकर बड़ों तक पानी के लिए हाथ में बर्तन लिए सुबह से ही जद्दोजहद में जुट जाते हैं. ताकि उनके परिवार वालों को दो बूंद पानी नसीब हो सके।
अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण आज सरकार एक अच्छी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. गर्मी की तपिश में जहां पारा 42 डिग्री के ऊपर जा पहुंचा है, ऐसे में जिले के आला अधिकारियों को जमीन पर उतरकर सच्चाई को देखने की जरूरत है. ताकि किसी भी ग्रामीण को बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज ना होना पड़े।