शारिक राणा, जिंदादिल इंसान का यूं चले जाना, आखरी सम्मान और मुलाकात
(नादिर राणा लेखक)
मुज़फ्फरनगर ही नहीं, बल्कि पूरे देश – विदेश में ‘चीतल ग्रांड’ का नाम जब भी लिया जाएगा, एक नाम अपने आप जुबां पर आ जाएगा, शारिक राणा!
एक ऐसा व्यक्तित्व, जो सिर्फ एक रिसॉर्ट के मालिक नहीं थे, बल्कि जिंदादिली, सौहार्द्र, और इंसानियत का चलता-फिरता उदाहरण थे।
शारिक राणा साहब से आख़िरी मुलाकात की यादें आज भी ताज़ा हैं, जब वो जिला कारागार मुज़फ्फरनगर के तत्कालीन अधीक्षक सीताराम शर्मा के साथ चीतल ग्रांड में आमने-सामने मिले थे। यह महज़ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि दो सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्तित्वों का आत्मिक मिलन था। दोनों ने एक-दूसरे को चीतल ग्रांड परिसर में सम्मानित किया था, और वह क्षण आज एक अमिट स्मृति बन चुका है। उस वक्त मैंने अपनी पुस्तक उनको *समाज और पहचान* भेंट की थी और उनका अभिनंदन और सम्मान किया था । उस पुस्तक में सौ प्रभावशाली लोगों में शारिक राणा को भी शामिल किया गया था।
शारिक राणा साहब का जीवन केवल व्यापारिक सफलता की कहानी नहीं थी। उनका जीवन एक ऐसे इंसान की कहानी है जो हर पौधे, हर पंछी, हर पेड़, और हर इंसान से प्रेम करता था। हरियाली से गहरा लगाव रखने वाले शारिक साहब ने चीतल ग्रांड को एक ‘ग्रीन ज़ोन’ बना दिया था,ऐसा स्थान जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
उनकी यही सोच चीतल ग्रांड को केवल एक रिसॉर्ट नहीं, बल्कि पर्यटन, पर्यावरण, और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक बना देती है। देश-विदेश में भ्रमण करने के बावजूद उनका दिल हमेशा अपनी मिट्टी से जुड़ा रहा।
शारिक साहब की सबसे बड़ी पूंजी उनका मुस्कुराता चेहरा और सभी के साथ मधुर संबंध थे। उनका मिलना ऐसा लगता था जैसे कोई अपना वर्षों बाद मिला हो। किसी भी जाति, धर्म, वर्ग से परे, उनका दिल सबके लिए खुला था। किसी का दुख हो या खुशी, वह हमेशा पास खड़े नज़र आते थे।
उनका हंसमुख स्वभाव और जीवन से भरी ऊर्जा हर किसी को प्रेरित करती थी। वह ना सिर्फ अपने क्षेत्र में नाम कमाने वाले व्यवसायी थे, बल्कि उन लोगों में से थे जो अपनी सफलता में दूसरों को भी साथ लेकर चलते हैं।
शारिक राणा का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक सोच, एक दृष्टिकोण, और एक जीवंत ऊर्जा का अचानक थम जाना है।
मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों के लिए यह क्षति अपूरणीय है। चीतल ग्रांड की हर दीवार, हर पेड़, और हर कोना आज उनकी याद में मौन खड़ा है।
शारिक राणा जैसे लोग कभी मरते नहीं, वे यादों में, प्रेरणाओं में, और अपने कामों में जीवित रहते हैं।
आज जब हम उनकी अनुपस्थिति महसूस कर रहे हैं, तब उनकी मुस्कान, उनका अपनापन, और उनका हरियाली से प्रेम हमें आगे बढ़ने और समाज के लिए कुछ अच्छा करने की प्रेरणा देता है।
खिराजे अकीदत ऐसी शख्सियत को जो जीते जी दिलों पर राज करती थी। इस दुनिया से विदा हो जाने के बाद भी उनकी कमी सदा खलती रहेगी।
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़