ब्यूरो चीफ राकेश मित्र जिला-कांकेर
अंग्रेजों की जासूसी करने वाले ही बंगालियों को अपराधी बोल रहे है
स्वतंत्रता के आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ देश के सभी समाज के लोगों की हिस्सेदारी रही है। आजादी के आंदोलन में बंगाली और आदिवासियों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है।बिरसा मुंडा से लेकर गुंडा धुर,गेंद सिंह,वीर नारायण सिंह,खुदीराम बोस, सूर्यसेन ,नेताजी सुभाष चंद्र बोस इन लोगों का स्वतंत्रा के संघर्ष में अहम भूमिका रही है। स्वतंत्रता के संग्राम के उस दौर में आर एस एस जैसे हिंदुत्ववादी संगठनों ने राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सेदारी करने के बदले अंग्रेजी हुकूमत के साथ खड़े थे।जो लोग आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों की जासूसी में लगे थे आज उसी विचारधारा के लोग बंगालियों को अपराधी बोल रहे है।आज जारी एक प्रेस बयान में राजमिस्त्री मजदूर रेजा कुली एकता यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष कमल रॉय ने बताया कि आजादी के आंदोलन में हिस्सेदारी करने वालों को अंग्रेज अपराधी करार देकर किसी को आजीवन कारावास और किसी को फांसी की सजाएं दिए थे। आज उसी फिरंगियों के जासूसी करने वाले मानसिकता के लोग समाज को ढाल बनाकर बंगाली समाज को अपराधी कह रहे है।देश के जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकारें है उन प्रदेशों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर बांग्लाभाषी लोगों को निशाना बनाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर बंदी ,गिरफ्तार कर जबरन बांग्लादेश भेजने का काम किया जा रहा है।बांग्लाभाषी होना ही बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों होने का कारण नहीं हो सकता है। बांग्लाभाषी बोलना कोई अपराध भी नहीं है। हमारे देश में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा में बंगला भाषा दूसरे स्थान पर है।लेकिन भाजपा नफरत और विभाजन की राजनीति करती है। बांग्लादेश और भारत की सीमाओं में सीमा सुरक्षा बल तैनात है जो केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है अगर सीमा से अवैध रूप से बांग्लादेश से घुसपैठिए आ रहे है फिर यह केंद्र सरकार की विफलता है।
मजदूर नेता ने कहा कि हाल ही में दिल्ली की भाजपा सरकार ने एक मोहल्ला के 1200 बंगाली परिवार के बिजली कनेक्शन को काट दिया है,यह भाजपा सरकार की अमानवीय कृत्य और बांग्लाभाषी विद्वेष को ही दर्शाता है।जो भाजपा पहले मुस्लिम और ईसाइयों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम करता था अब वो बंगाली हिंदुओं को ही निशाना बनाया है। राय में असम की मुख्यमंत्री के उस बयान का तीखी आलोचना करते हुए कहा कि जिसमें भाजपा के मुख्यमंत्री ने कहा था एन आर सी में जो भी अपनी मातृभाषा बंगाली लिखेगा उससे आसानी से चिन्हित किया जा सकेगा कौन बांग्लादेशी घुसपैठी है। गौरतलब है कि असम में जो एन आर सी हुआ था उसमें 24 लाख अवैध नागरिकों को डी वोटर कहकर उनकी नाम मतदाता सूची से विलोपित किया गया था जिसमें 18 लाख हिन्दू है। कमल रॉय ने कहा अपराधी का कोई धर्म,भाषा या जाति नहीं होता है,अपराध को अंजाम देने वाला ही अपराधी होता है।मजदूर नेता ने कहा कि अंग्रेजों की नीति रहा है “फूट डालो और राज करो” और आज उनके जासूसी करने वाले भी यह नीति अपनाए हुए है।किसी एक विशेष समाज को ढाल बनाकर बांग्लाभाषियों के खिलाफ दुष्प्रचार चलाकर समाज को विभाजित कर रहे है।
यूनियन नेता ने कहा कि जो सरकार नागरिकता संशोधन कानून (सी ए ए) लागू करते समय प्रचार कर रहे थे कि हिंदुओं की नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है आज उन बंगाली हिंदुओं को ही प्रताड़ित किया जा रहा है।
जिस एन आर सी में जन्म प्रमाणपत्र या जमीन के दस्तावेज को ही नागरिक होने का प्रमाण माना जाएगा तब स्वाभाविक रूप से ही हमारे देश के अधिकतर गरीब आदिवासी दलित तबकों के पास यह दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें भारत के नागरिक नहीं माना जाएगा।
उन्होंने भाजपा की विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ सभी तबकों के गरीब जनता को एकजुट होने पर बल दिया।
प्रेषक
कमल रॉय
मो9425237312