नन्दगोपाल पाण्डेय ब्यूरोचीफ सोनभद्र
कहा तत्काल फर्जी हॉस्पिटल का पर अंकुश नहीं लगता है तो होगा बड़ा आंदोलन: सेराज हुसैन
सोनभद्र। सोनभद्र की चिकित्सा व्यवस्था पर यह शेर बहुत सटीक बैठता है, “अस्पतालों के सन्नाटे चीखते हैं यहाँ” भ्रष्टाचार के साए में मरते हैं यहाँ।
उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी बहुल और चार राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड) से जुड़ा ज़िला सोनभद्र एक बार फिर अपनी जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है। यहां की चिकित्सा सेवाओं की दुर्दशा अब सिर्फ़ आंकड़ों या शिकायतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे आम लोगों की जान से खेल रही है। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ज़िला मुख्यालय पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय का घेराव किया और धरना प्रदर्शन करते हुए सरकार और स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सोनभद्र जैसे बड़े और भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील ज़िले में सरकारी अस्पतालों की हालत बद से बदतर हो क्यो है। ज़िले के ग्रामीण इलाकों में तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं, वहीं जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बदहाली का शिकार हैं। मरीजों को बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। निजी अस्पतालों पर पूरी तरह निर्भरता बढ़ गई है, लेकिन वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और लूटखसोट की वजह से आम आदमी के लिए हालात और विकट हो रहे हैं।
कांग्रेसी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि जिले की 23 लाख से अधिक आबादी की चिकित्सा ज़रूरतें एक मज़बूत और पारदर्शी स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग करती हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि जिले में मेडिकल कॉलेज की घोषणा तो वर्षों पहले हो चुकी थी, मगर ICU और आधुनिक सुविधाएं अब तक नदारद हैं। यहां तक कि आपात स्थिति में गंभीर मरीजों को वाराणसी या प्रयागराज रेफर करना मजबूरी बन चुका है। कई बार रास्ते में ही मरीजों की मौत हो जाती है।
धरना स्थल पर मौजूद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं समाजसेवी जिला सचिव मोहम्मद सेराज हुसैन ने कहा, “यह केवल बदइंतज़ामी का मामला नहीं है, यह इंसानियत को झकझोर देने वाली सच्चाई है। चार राज्यों से जुड़े इस जिले में लोग इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां के अस्पताल खुद बीमार हालत में हैं। सरकार की उदासीनता और स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार ही इस संकट की जड़ है।”
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सवाल उठाया—
“स्वास्थ्य मंत्री जी सोनभद्र की स्वास्थ्य समस्याओं पर मौन क्यों?”
“अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई और मेडिकल कॉलेज में ICU सुविधा कब?”
“विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी पर जिम्मेदार मौन क्यों
महिला जिलाध्यक्ष उषा चौबे ने भी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब आदिवासी महिलाएं प्रसव पीड़ा के समय घंटों अस्पताल के बाहर तड़पती रहती हैं, एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचती और कई जिंदगियां यूं ही दम तोड़ देती हैं।
कांग्रेस जिला प्रवक्ता शत्रुंजय मिश्रा व जिला महासचिव राहुल सिंह पटेल चेतावनी दी कि अगर 15 दिन के भीतर सोनभद्र के अस्पतालों की स्थिति सुधारने और मेडिकल कॉलेज में ICU सुविधा चालू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और प्रदेश स्तर तक सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेंगे।
धरना-प्रदर्शन के दौरान ज़िला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के साथ कई सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सभी ने सामूहिक रूप से CMO को ज्ञापन सौंपकर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, जर्जर स्वास्थ्य केंद्रों के पुनर्निर्माण, दवाइयों की आपूर्ति और निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने की मांग की।
सोनभद्र जैसे सीमावर्ती और खनिज संपदा से संपन्न ज़िले में जब जनता बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से ही वंचित है, तब यह सवाल वाजिब है कि विकास की दौड़ में इंसानियत और करुणा कहां खो रही है। कांग्रेसियों का यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि उस इंसानी दर्द की पुकार है जिसे अब और नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो गया है। अंत में एक शेर बस बात ख़त्म, “ज़िंदगी माँग रही थी एक सांस का सहारा,
हुकूमत ने कहा – इंतज़ार करो, इंतज़ार हमारा”। प्रदर्शन के दौरान पूर्व पीसीसी सदस्य हाजी नूरुद्दीन खान पूर्व जिला उपाध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी स्वामी अरविंद सिंह पूर्व जिला महासचिव कन्हैया पांडे ,प्रमोद कुमार पांडे, निगम मिश्रा ,बंसी देव पांडे ,रामरूप शुक्ला ,संतोष कुमार नागर, शिवपूजन शर्मा विश्वकर्मा, सीमु सिंह पटेल, शांति विश्वकर्मा ,नौशाद खान, सुनील कुमार मिश्रा, समेत दर्जनों लोगों कार्यक्रम में शामिल रहेl