इंडियन न्यूज़ रिपोर्टर संतोष गोल्हानी मोबाइल नंबर
सिवनी/लखनादौन, जनजाति कार्य विभाग मध्य प्रदेश – सिवनी जिले में सरकारी निर्माण कार्यों में जारी भ्रष्टाचार ने अब अपनी क्रूरता दिखानी शुरू कर दी है। एक तरफ जहां केवलारी के बिनेकी में निर्माणाधीन संदीपनी विद्यालय की छत ढलाई के दौरान गिर गई, वहीं दूसरी तरफ लखनादौन के भैरोथान में बन रहे कन्या छात्रावास परिसर छात्रावास में भी खुलेआम घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है। ये दोनों घटनाएं सिर्फ खराब निर्माण नहीं, बल्कि सत्ता और ठेकेदारों के गठजोड़ का जीता-जागता सबूत हैं, जो आदिवासी बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है।
*संदीपनी विद्यालय का हादसा भ्रष्टाचार का परिणाम*
केवलारी में हुई घटना ने जिला प्रशासन के मुंह पर तमाचा मारा है। यह हादसा सिर्फ एक इमारत का ढहना नहीं, बल्कि तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से चल रहे बड़े घोटाले का परिणाम है। छत गिरने से धनसिंह झारिया, राजाराम गजेन्द्र, लोकेश उईके, बलीराम परतेती, राकेश मरावी, और कोमल कुशवाहा जैसे गरीब मजदूर घायल हुए हैं, जिन्हें अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए इस घटिया निर्माण का शिकार होना पड़ा। इस हादसे ने यह साबित कर दिया है कि निर्माण में गुणवत्ता के मानकों को निर्ममता से कुचला जा रहा है और अधिकारियों का मौन इस मिलीभगत की पुष्टि करता है।
*लखनादौन का छात्रावास भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी इमारत*
लखनादौन के भैरोथान में बन रहे छात्रावास की स्थिति और भी भयावह है। यहां निर्माण में घटिया ईंट, कम सीमेंट, और सबसे खतरनाक – काली रेत (स्टोन सैंड) का उपयोग किया जा रहा है। . यह इमारत न सिर्फ कमजोर है, बल्कि कभी भी धराशायी हो सकती है, जिससे इसमें रहने वाले आदिवासी बच्चों का जीवन सीधे तौर पर खतरे में आ जाएगा। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि ठेकेदार का सीधा संबंध सत्ताधारी पार्टी से है। जिला प्रशासन और मोहन यादव सरकार के मंत्री इस भ्रष्टाचार पर आंखें मूंदे हुए हैं, जैसे उनकी जेबें ‘पद के हिसाब से मोटी रकम’ से भर दी गई हों। यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के भविष्य की बलि है।
सूत्रों के अनुसार विकासखंड लखनादौन जनजाति कार्य विभाग का भवन में यूं तो शासकीय निर्माण कार्यों में लीपा पोती कर खाना पूर्ति कर निर्माण कर दिया जाता है जिसका नतीजा साल 2 साल बाद देखने को मिलता है शासन प्रशासन को फिर भी सबक नहीं लगता और शायद इसलिए ठेकेदारों को घटिया निर्माण करने की खुली छूट दी जाती है
इसलिए घटिया मटेरियल लगाकर बिल्डिंग तैयार कर दी जाती है जिसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत सागईमाल के भैरोथान के पास जो छात्रावास बनाया जा रहा है वह लखनादौन से 10 किलोमीटर दूरी पर है जहां न कोई देखने वाला है ना सुनने वाला ठेकेदार की मनमर्जी से मसाला और मटेरियल लगाया जा रहा है जो जांच का विषय है
हालांकि हम जानते हैं की समाचार लिखने के बाद अधिकारी कुछ नहीं करेंगे उसका कारण है कि ठेकेदार पहुंच पकड़ वाला और भाजपा की सक्रिय राजनीति में अपना पैर जमाए हुए हैं इसलिए आज तक स्टोन क्रेशर में चल रही अवैध खुदाई पर भी खनिज अधिकारी और राजस्व के अधिकारी भी मौन हैं कहीं ना कहीं मोहन यादव की सरकार के मंत्रियों का हाथ इनके सर पर है और रहा सवाल प्रशासनिक अधिकारियों का तो उनकी जेब में पद के हिसाब से मोटी रकम भर दी जाती है
समाचार कड़वा है पर सोला आने सच है
और यदि शासन प्रशासन के कर्मचारी अधिकारी इतने ही ईमानदार हैं तो क्यों ना सिवनी जिले के कलेक्टर इसकी सूक्ष्मता से जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे
क्या कलेक्टर लेंगे कठोर कदम
दोनों घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सिवनी जिले में निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की दलदल में फंस चुके हैं। सवाल यह है कि क्या सिवनी जिले के कलेक्टर इन गंभीर मामलों को संज्ञान में लेंगे? क्या वे ठेकेदारों और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे, या फिर इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं, जिनकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन और सरकार की होगी। यह समय है दोषियों को बेनकाब करने और उन्हें सजा देने का, ताकि हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।