जोधपुर 04 अक्टूबर 2025 संगरिया फाटा
इलाके में स्थित बजरंग विहार और आसपास की कॉलोनियों में सीवरेज का पानी और स्थानीय फैक्टरियों से निकलने वाला नीला रंग का जहरीला पानी भर जाने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। सड़कें और गलियां पानी से लबालब भरी हुई हैं, जिससे निवासियों को घरों से निकलना तक मुश्किल हो रहा है। यह समस्या पिछले कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोग स्वास्थ्य जोखिमों और पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत कर रहे हैं, जबकि फैक्टरियां बिना किसी रोक-टोक के अपना अपशिष्ट पानी कॉलोनी में बहा रही हैं।समस्या की शुरुआत और वर्तमान स्थिति संगरिया फाटा, जो जोधपुर के औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक स्थित है, यहां कई छोटी-बड़ी फैक्टरियां संचालित हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले सप्ताह भारी बारिश के बाद सीवरेज सिस्टम चोक हो गया, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल गया। लेकिन समस्या यहीं नहीं रुकी। आसपास की कुछ रासायनिक और डाई फैक्टरियों से निकलने वाला नीला रंग का पानी, जो संभवतः रासायनिक अपशिष्ट है, सीवरेज के साथ मिलकर कॉलोनियों में भर गया है। यह पानी इतना जहरीला है कि इससे दुर्गंध फैल रही है और त्वचा पर संपर्क से जलन हो रही है
हमारे घरों के सामने 2-3 फीट तक पानी भरा हुआ है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बुजुर्ग घर में कैद हो गए हैं। फैक्ट्री का नीला पानी मिलने से यह और भी खतरनाक हो गया है। अगर कोई गिर जाए तो बीमार पड़ सकता है। हमने कई बार नगर निगम को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”कॉलोनी की महिलाएं भी इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सुनीता देवी कहती हैं, “सब्जी खरीदने जाना हो या बच्चों को खेलने भेजना, सब मुश्किल हो गया है। पानी में मच्छर पनप रहे हैं, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। फैक्टरियां रात के समय चुपके से अपना गंदा पानी बहाती हैं, जो सीधा हमारे इलाके में आता है।”पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभावयह समस्या न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, फैक्टरियों से निकलने वाला नीला पानी संभवतः इंडिगो या अन्य रासायनिक डाई से युक्त है, जो भूजल को प्रदूषित कर सकता है। जयपुर में पहले भी औद्योगिक अपशिष्ट के कारण जल प्रदूषण की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, और यह मामला उसी कड़ी का हिस्सा लगता है।स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि इस पानी के संपर्क से त्वचा रोग, श्वास संबंधी समस्याएं और पेट की बीमारियां हो सकती हैं। एक स्थानीय क्लिनिक के डॉ. अशोक कुमार ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में ऐसे मरीज बढ़े हैं जिन्हें पानी में गिरने या संपर्क से एलर्जी और संक्रमण हुआ है। अगर जल्दी सफाई नहीं हुई तो महामारी फैल सकती है।”प्रशासन की लापरवाही और निवासियों का गुस्सानिवासियों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फैक्टरियों के खिलाफ कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहे हैं। बजरंग विहार रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सिंह ने कहा, “हमने कई बार लिखित शिकायत की है। फैक्टरियां बिना ट्रीटमेंट प्लांट के अपशिष्ट बहा रही हैं, जो कानून का उल्लंघन है। लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण कोई एक्शन नहीं हो रहा। हम अब प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं।
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरपीसीबी) से संपर्क करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।संभावित समाधान और मांगेंस्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि:तत्काल सीवरेज की सफाई की जाए और पानी निकासी की व्यवस्था की जाए।
फैक्टरियों के अपशिष्ट पर सख्त जांच हो और दोषियों पर जुर्माना लगाया जाए।
कॉलोनी में स्थायी ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न हो।
स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएं और प्रभावितों को सहायता दी जाए।
यह घटना जयपुर जैसे शहरों में बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन की कमी को उजागर करती है। अगर जल्दी कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
Jodhpur sambhag buro Chief Indian TV news
Deepak bamaniya