गोरखपुर के जेडी कार्यालय से पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिले की टीम के साथ मंगलवार को पडरौना शहर के चार निजी अस्पतालों और एक पैथोलॉजी की जांच की। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिले। जबकि मरीज भर्ती थे। एक निजी अस्पताल में भर्ती महिला के परिजनों ने आशा पर निजी अस्पताल में भर्ती कराने का आरोप लगाया। जहां उसके बच्चे की मौत हो गई।
मंगलवार को संयुक्त टीम सबसे पहले छावनी व सोहरौना में स्थापित बुद्धा हॉस्पिटल पहुंची। यहां डॉक्टर नहीं मिले। बताया कि ऑन कॉल आते हैं। ओटी में बड़ी मात्रा में गंदगी मिली। इसकी वजह पूछने पर स्टाफ बगले झांकने लगे। अस्पताल रजिस्टर्ड पाया गया। इसके बाद टीम न्यू गैलेक्सी अस्पताल पहुंची। यहां भी वही हाल था।
यहां विशुनपुरा ब्लॉक के धौरहरा की पिंकी जैन भर्ती थीं। उनके परिजन शिवांक ने बताया कि गांव की आशा बीते एक अक्तूबर को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल ले आई थी। रात में महिला डॉक्टर ने सभी रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि स्थिति ठीक नहीं है। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है। वहां कोई व्यवस्था भी नहीं है, वह लोग मरीज को लेकर पास के निजी अस्पताल ले जाएं। वहां से अच्छे डॉक्टर हैं। इसके बाद मरीज को वह लेकर यहां आ गए। बच्चे की मौत भी हो गई। उसके गले में नाल फंसी थी, जो रिपोर्ट में दिख रही थी मगर महिला अस्पताल की डॉक्टर ने इस बारे में कुछ नहीं बताया था।
इसके बाद टीम ने एमएस अस्पताल व मेडिकेयर अस्पताल की जांच की। यहां भी डॉक्टर नहीं मिले। मानकों का उल्लंघन पाया गया। मेडिकेयर अस्पताल के बारे में पता चला कि इस अस्पताल को कुछ दिन पहले गड़बड़ियों पर सील किया गया था। तब इसका नाम दूसरा था अब नाम बदल कर उसकी जगह वहीं ऊपरी तल पर दूसरे अस्पताल के संचालन का पंजीयन मिल गया है। टीम ने सभी को नोटिस देकर जवाब तलब किया है।
पैथोलॉजी केंद्र पर 45 मिनट तक इंतजार करती रही टीम
इसके बाद संयुक्त टीम पडरौना शहर के सुभाष चौक स्थित कुमकुम डायग्नोटिक सेंटर पहुंची। वहां जांच कराने वालों की भीड़ थी। सेंटर संचालक डॉक्टर नहीं मिले। स्टाफ ने जांच में कोई सहयोग नहीं किया। टीम के लोगों ने डॉक्टर से मोबाइल पर बात कर उन्हें आने कहा मगर वह नहीं आए। टीम 45 मिनट तक इंतजार करने के बाद लौट गई। सेंटर संचालक को नोटिस देकर जवाब तलब किया. Rajesh Maurya Kushinagar