नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग
घाटशिला उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत हेमंत सोरेन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर जनता की मुहर
हजारीबाग: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रत्याशी सोमेश चन्द्र सोरेन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिसके बाद पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। इस जीत को लेकर झामुमो के जिला प्रवक्ता कुणाल यादव ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह जीत सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर जनता द्वारा लगाया गया ठोस मुहर है।
कुणाल यादव ने कहा कि यह परिणाम साबित करता है कि झारखंड की जनता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व और उनकी योजनाओं से खुश है।उन्होंने कहा यह कोई साधारण जीत नहीं है। यह जनता का भरोसा है, जो हेमंत सोरेन के काम, उनके संघर्ष और उनकी जनता-समर्पित नीतियों का सम्मान करते हुए मिला है।
सोमेश चन्द्र सोरेन बी.टेक इंजीनियर हैं और युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उनकी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कुणाल यादव ने कहा कि घाटशिला की जनता ने एक युवा, पढ़े-लिखे और दूरदर्शी व्यक्ति को विधानसभा भेजकर पूरे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का रास्ता खोल दिया है।
कुणाल यादव ने इस ऐतिहासिक जीत के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, घाटशिला चुनाव प्रभारी दीपक बिरुवा, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, केन्द्रीय महासचिव विनोद पाण्डेय, केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजीव बेदिया, सहित सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि पार्टी की एकजुटता, संगठनात्मक मजबूती और जनता के बीच लगातार जुड़ाव ने ही इस जीत को संभव बनाया।
बिहार चुनाव को लेकर बोलते हुए कुणाल यादव ने राजद और कांग्रेस पर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की हार का एक बड़ा कारण झारखंड मुक्ति मोर्चा को नज़रअंदाज़ करना भी है।उन्होंने कहा अगर महागठबंधन में झामुमो को उचित सम्मान और स्थान दिया जाता, तो बिहार चुनाव का परिणाम बिल्कुल अलग होता। हमारा संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत है, खासकर सीमावर्ती जिलों में हमारा प्रभाव निर्णायक साबित हो सकता था।उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में क्षेत्रीय दलों को सम्मान देने, उनकी ताकत को समझने और साथ मिलकर लड़ने की आवश्यकता है, तभी भाजपा जैसी शक्तियों को टक्कर दी जा सकती है।घाटशिला की जीत ने झामुमो के राजनीतिक आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजा हेमंत सोरेन के प्रति झारखंड की जनता के विश्वास, संगठन की मजबूती और विपक्षी दलों के अंदर बढ़ती असहमति का संकेत है।