दिनारा।जब अधिकांश लोग कड़ाके की ठंड से बचने के लिए घरों में दुबके रहते हैं, ऐसे समय में गौ माता, भारतीय सेना और समस्त जीव-जंतुओं की रक्षा एवं विश्व कल्याण के लिए कठोर तपस्या करना सच्चे सेवा भाव और त्याग की मिसाल है। दिनारा क्षेत्र के गौ सेवक कल्लू महाराज इन दिनों ऐसी ही अद्भुत और प्रेरणादायी तपस्या में लीन हैं, जो समाज के लिए एक संदेश बनकर उभर रही है।गौ सेवक कल्लू महाराज ने बताया कि यह उनकी द्वितीय तपस्या है, जो दिनांक 5 जनवरी से 26 फरवरी तक निरंतर की जा रही है। यह तपस्या विशेष रूप से गौ माता की रक्षा, भारतीय सेना के मनोबल, देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की सुरक्षा तथा विश्व कल्याण के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि “हमारे लिए तपस्या ही गौ माता का कवच बनेगी और वही हमारी रक्षा करेगी।कल्लू महाराज ने भारतीय सेना के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार हमारी इंडियन आर्मी कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और कठिन परिस्थितियों में सरहदों पर खड़े होकर भारत माता की रक्षा करती है, उसी भावना से प्रेरित होकर वे भी तपस्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह तपस्या केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि भारत में निवास करने वाले सभी मानव, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, पेड़-पौधों और सम्पूर्ण पृथ्वी के कल्याण के लिए है।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हमारे लिए सभी सर्वोपरि हैं — चाहे वह गौ माता हो, जीव-जंतु हों, मानव समाज हो या प्रकृति। इस तपस्या का उद्देश्य यही है कि किसी पर कोई आंच न आए, सभी स्वस्थ रहें, निरोगी रहें और देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े। गौ सेवक कल्लू महाराज ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के तपस्वी जीवन का भी उल्लेख किया और कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के उत्थान के लिए कठिन तपस्या की है, उसी से प्रेरणा लेकर वे भी अपने स्तर पर तपस्या कर रहे हैं। उनका मानना है कि तपस्या केवल आत्मशुद्धि का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण का मार्ग है।इस तपस्या का एक विशेष पक्ष यह भी है कि यह रात्रि के समय कई घंटों तक की जाती है। कड़ाके की ठंड में खुले वातावरण में बैठकर साधना करना उनके दृढ़ संकल्प और सेवा भावना को दर्शाता है। कल्लू महाराज का कहना है कि यह तपस्या गौ माता, भारतीय सैनिकों और समाज के लिए एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच का कार्य करेगी।उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को स्मरण करते हुए कहा उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शेर की तरह साहसी बनें, सेवा और समर्पण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं।अपने संदेश में गौ सेवक कल्लू महाराज ने भावुक शब्दों में कहा दिल दिया है, जान भी देंगे — गौ माता, भारतीय सैनिक, जीव-जंतु और मानव समाज के लिए। हम 24 घंटे सेवा के लिए तत्पर हैं।कल्लू महाराज की यह तपस्या न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि राष्ट्रभक्ति, करुणा और विश्व कल्याण की भावना का जीवंत उदाहरण भी है, जो समाज को सेवा, समर्पण और संवेदना का मार्ग दिखाती है।