गण्डारा बहराइच से मुहम्मद आरिफ
(इंडियन टी वी न्यूज़ ) – साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 06 शातिर साइबर ठग गिरफ्तार, साइबर ठगी में प्रयुक्त वाहन SUV 700 व 15,40,000 रूपये नगद बरामद
जनपद में संचालित साइबर अपराध सम्बन्धित हॉटस्पॉट पर कार्यवाही करते हुये करोड़ो की ठगी करने वाले सक्रिय गैंग का भंडाफोड करते हुये एक बड़े साइबर अपराध के संगठित गिरोह के 06 शातिर साइबर अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार व उनके कब्जे से घटना में प्रयोग की जाने वाली एक महिन्द्रा कम्पनी की सफेद SUV 700, 07 अदद मोबाइल फोन, 01 पूर्व हस्ताक्षरित चेकबुक, 01 नोट गिनने वाली मशीन व रुपये 15,40,000 नगद धनराशि।
पुलिस अधीक्षक महोदय बहराइच द्वारा जनपद बहराइच में साइबर अपराध से सम्बन्धित हॉटस्पॉट के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने हेतु दिये गये सख्त निर्देश के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक / नोडल अधिकारी साइबर क्राइम श्री दुर्गा प्रसाद तिवारी व क्षेत्राधिकारी नगर/ अपराध श्री नारायण दत्त मिश्र के निकट पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना निरीक्षक श्री रणजीत यादव व साइबर/सर्विलांस सेल प्रभारी निरीक्षक श्री अभिनव सिंह के नेतृत्व में मु0अ0सं0 02/2026 धारा 318(4), 308(5), 351(3), 352, 317(2), 61(2) बीएनएस व धारा 66 डी आईटी एक्ट के बावत अभियुक्तगण द्वारा संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करके, लोगों को लालच देकर उनके बैंक खातों में साइबर फ्रॉड का पैसा मंगाकर चेक के माध्यम से निकाल लेते थे । अभियोग से सम्बन्धित 06 अभियुक्त 1. मो0 कैफ खान 2. नूर अहमद 3. अर्शियान उर्फ सुहेल 4. मो0 आमिर 5.सत्येन्द्र चौहान 6. रामजी यादव को राजापुर माफी से गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा जा रहा है।
अपराध करने का तरीकाः
अभियुक्तगणों द्वारा सुनियोजित एवं संगठित ढंग से साइबर ठगी के उद्देश्य से एक सुव्यवस्थित नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। इस नेटवर्क के अंतर्गत इनके द्वारा लोगों को धन का प्रलोभन देकर उनके नाम से नए बैंक खाते खुलवाते हुए उनके पूर्ववर्ती खातों का उपयोग किया जाता था । इन खातों में साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि मंगाई जाती थी। बदले में खाता धारकों को कमीशन दिया जाता था, जबकि शेष राशि को चेक के माध्यम से निकालकर अभियुक्तगण आपस में बाँट लेते थे।
इस पूरे षड्यंत्र में मो० आमिर की भूमिका खातों के प्रबंधन की थी, जो इन खातों को अपने सहयोगी सह-अभियुक्त नूर अहमद एवं अर्शियान उर्फ सुहेल को उपलब्ध कराता था। इसके पश्चात अभियुक्त कैफ एवं अन्य सह-अभियुक्त इन खातों में साइबर ठगी की धनराशि मंगाकर पूर्व-हस्ताक्षरित चेकों के माध्यम से उसे शीघ्रता से निकाल लेते थे।
विशेष रूप से, खाता धारकों से पहले ही सुनियोजित तरीके से उनके चेकबुक पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते थे, ताकि खाते में धनराशि आते ही, किसी प्रकार की शिकायत दर्ज होने से पूर्व, उसे तत्काल निकाल लिया जाए। इस प्रकार, अभियुक्तगण योजनाबद्ध तरीके से अवैध धन का लेन-देन कर आपस में उसका वितरण करते थे।
साइबर अपराध से बचाव हेतु सुझाव
ठगी का शिकार होने पर अपने नजदीकी थाने की साइबर सेल पर तत्काल संपर्क करें अथवा भारत सरकार द्वारा जारी नंबर 1930 पर कॉल करें। किसी भी प्रकार के साइबर क्राइम से सम्बन्धित आनलाइन शिकायत भारत सरकार द्वारा जारी अनलाइन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in के माध्यम से करें।