शहजाद आलम जिला संवाददाता सिद्धार्थनगर
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी बॉर्डर पर प्रस्तावित भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य ठप होने से स्थानीय लोगों, व्यापारियों और सीमा क्षेत्र से आने-जाने वाले यात्रियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि अधूरे निर्माण के कारण न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
बढ़नी बॉर्डर भारत और नेपाल के बीच व्यापार और आवाजाही का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग, व्यापारी और वाहन गुजरते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सीमा क्षेत्र के सुंदरीकरण और बेहतर यातायात व्यवस्था के उद्देश्य से एक आकर्षक एवं आधुनिक प्रवेश द्वार बनाने की योजना तैयार की गई थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि यह गेट बढ़नी की पहचान बनेगा और सीमा क्षेत्र की सुंदरता में भी चार चांद लगाएगा।
हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ समय तक तेजी दिखी, लेकिन बाद में काम पूरी तरह धीमा पड़ गया और अब स्थिति यह है कि अधूरा ढांचा प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयान कर रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि गेट का निर्माण समय पर पूरा हो जाता तो सीमा क्षेत्र में यातायात अधिक व्यवस्थित होता और बाहर से आने वाले लोगों पर भी बेहतर प्रभाव पड़ता।
सीमावर्ती व्यापारियों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि बढ़नी बॉर्डर व्यापारिक दृष्टि से बेहद अहम है। आधुनिक प्रवेश द्वार बनने से व्यापार को नई पहचान मिलती और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़तीं। लेकिन निर्माण में हो रही देरी के कारण इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अधूरे निर्माण के चलते कई बार जाम और अव्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार परियोजना में देरी के पीछे प्रशासनिक सुस्ती, फंड की कमी और ठेकेदारों की लापरवाही जैसे कारण सामने आ रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब या समयसीमा नहीं दी गई है कि निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य को पूरा कराया जाए, ताकि सीमा क्षेत्र की पहचान मजबूत हो सके और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।