बरेली के थाना फरीदपुर क्षेत्र में गर्मी से राहत पाने रामगंगा में उतरे चार दोस्तों में से एक की जान चली गई। केवट की सूझबूझ से तीन किशोरों की जान बच गई, लेकिन दसवीं में पढ़ने वाला 16 साल का ओम जाटव गहरे पानी में समा गया। डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया शव देख परिवार में चीख-पुकार मच गई। पूरा गांव गम में डूब गया।
भीषण गर्मी में मौत का घाट बना गोपालपुर घाट
घटना गुरुवार दोपहर फरीदपुर कोतवाली क्षेत्र के रामगंगा स्थित गोपालपुर घाट की है। बरेली के दुर्गा नगर निवासी इलेक्ट्रिशियन रजनीश जाटव का 16 वर्षीय बेटा ओम दसवीं का छात्र था। गर्मी की छुट्टियों में वह अपने बड़े भाई ऋषि के साथ पांच दिन पहले भमोरा थाना क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर अपनी दादी रम्पा देवी से मिलने आया था।
दोपहर में ओम, भाई ऋषि, गांव के सुमित 16 और रजित उर्फ प्रिंस 12 बिना बताए घर से करीब ढाई किमी दूर नदी किनारे पहुंच गए। चारों जैसे ही पानी में उतरे, अचानक गहराई में चले गए और डूबने लगे।
केवट बना फरिश्ता, रस्सी फेंककर बचाई 3 जानें
उसी वक्त नाव लेकर घाट पर पहुंचे एक केवट की नजर बच्चों पर पड़ी। उसने तुरंत रस्सी फेंकी। ऋषि, सुमित और रजित ने रस्सी पकड़ ली और किसी तरह नाव तक पहुंच गए। लेकिन ओम रस्सी तक नहीं पहुंच सका और तेज बहाव में लापता हो गया।
केवट और बच्चों के शोर मचाने पर गोपालपुर, गोबिंदपुर, हिम्मतपुर के ग्रामीण मौके पर दौड़े। खेतों में खरबूजा-तरबूज की रखवाली कर रहे कई लोग नदी में कूद पड़े। लेकिन पानी की गहराई अधिक होने से करीब डेढ़ घंटे तक ओम का पता नहीं चला।
अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने बताया मृत
ग्रामीणों ने आखिरकार बेहोशी की हालत में ओम को बाहर निकाला। परिजनों को उम्मीद थी कि शरीर में गर्माहट बची है, शायद सांस चल रही हो। आनन-फानन में उसे बरेली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। शव गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में मातम पसर गया। ओइम तीन भाइयों में मझला था। बड़ा भाई ऋषि आईटीआई कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामगंगा के इस हिस्से में हर साल गर्मियों में डूबने की घटनाएं होती हैं, लेकिन यहां न चेतावनी बोर्ड हैं, न गोताखोरों की तैनाती। ग्रामीणों ने मांग की है कि घाटों पर सुरक्षा इंतजाम किए जाएं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
गांव में आज चूल्हे नहीं जले। ओम के दोस्तों की आंखों में खौफ और परिवार की चीखें बता रही हैं कि एक पल की लापरवाही ने पूरे घर की खुशियां निगल लीं।