बालाघाट।
वैनगंगा नदी पर बन रहा पुल एक ऐसा निर्माण कार्य, जो विकास का प्रतीक होना चाहिए था लेकिन अब सवालों के घेरे में है।मामला है घोटी से धापेवाड़ा के बीच वैनगंगा नदी पर बन रहे पुल का जहां निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं की तस्वीरें सामने आई हैं।जहां काम भी तेजी से नहीं हो पा रहा है, लेकिन नियमों और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। बिना रॉयल्टी के रेत का इस्तेमाल स्थानीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण में जो रेत उपयोग की जा रही है अवैध रूप से की जा रही हैँ म. प्र. सरकार द्वारा रॉयलटी देना बंद कर दिया गया हैँ तो निर्माण कार्य में रेत कहां से आ रही है अब उसकी वैध रॉयल्टी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मजदूरों की जान खतरे में
काम कर रहे मजदूरों के पास ना हेलमेट, ना सेफ्टी बेल्ट, ना कोई सुरक्षा उपकरण। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता हैँ वही निर्माणाधीन पुल में पानी से तराई (क्योरिंग) सही तरीके से नहीं की जा रही,जो किसी भी कंक्रीट संरचना की मजबूती के लिए बेहद जरूरी होती है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में यह पुल कमजोर और खतरनाक साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है—
“काम में भारी लापरवाही हो रही है, कोई देखने वाला नहीं है।”
मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो बड़ा हादसा तय है।”
सबसे बड़ा सवाल ये है कि
क्या प्रशासन को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है?
अगर है, तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? एक तरफ सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है…
तो वहीं दूसरी तरफ ऐसे निर्माण कार्य
उन दावों की पोल खोलते नजर आते हैं।
अगर समय रहते इन अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी,
तो यह पुल विकास नहीं—
बल्कि एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
लोकेशन, बालाघाट
रिपोर्टर अनिल कातरे