किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सर्विस टैक्स की बकाया वसूली से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि किसी प्रोपराइटरशिप फर्म के मालिक की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिसों से मृतक की कर देनदारी की वसूली नहीं की जा सकती, यदि संबंधित कानून में ऐसा करने का स्पष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं है।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने भिलाई निवासी देवन अनीषा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मृतक करदाता के कानूनी वारिसों के खिलाफ गार्निशी नोटिस या रिकवरी नोटिस जारी करना कानूनन उचित नहीं है, क्योंकि संबंधित कानून में ऐसी वसूली का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वैधानिक प्रावधान के अभाव में किसी व्यक्ति की कर देनदारी स्वतः उसके कानूनी वारिसों पर स्थानांतरित नहीं की जा सकती। इसलिए केवल वारिस होने के आधार पर उनसे सर्विस टैक्स की बकाया राशि की वसूली नहीं की जा सकती।
यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां किसी प्रोपराइटरशिप फर्म के मालिक की मृत्यु के बाद कर वसूली को लेकर कानूनी विवाद उत्पन्न होते हैं।