डॉक्टरों सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण, ऑपरेशन के दौरान बेहद गंभीर स्थिति में पहुंचे एक 23 वर्षीय युवक को सफलतापूर्वक मौत के मुंह से बाहर निकाल कर नवजीवन दिया गया है।ऑपरेशन के दौरान धड़कन और ब्लड प्रेशर हुआ शून्यप्राप्त जानकारी के अनुसार, एक 23 वर्षीय युवक को पेशाब की नली में पथरी (Stone) के ऑपरेशन के लिए स्मीमेर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सर्जरी की प्रक्रिया के दौरान अचानक मरीज की तबीयत बिगड़ गई। देखते ही देखते उसके दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर (BP) पूरी तरह शून्य हो गए। लगभग 15 से 20 मिनट तक मरीज का दिल पूरी तरह से बंद रहा, जिसे चिकित्सा विज्ञान में बेहद नाजुक स्थिति माना जाता है।डॉक्टरों की टीम ने युद्ध स्तर पर शुरू किया इलाजइस अत्यंत गंभीर और आपातकालीन स्थिति में एनेस्थीसिया और मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला। डॉक्टरों द्वारा मरीज को तुरंत सीपीआर (CPR) और इलेक्ट्रिक शॉक देना शुरू किया गया। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और त्वरित निर्णय का ही परिणाम था कि करीब 20 मिनट बाद युवक का बंद पड़ा दिल एक बार फिर धड़कने लगा।20 दिनों तक ICU में रखी गई कड़ी निगरानीदिल दोबारा धड़कने के बाद मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत आईसीयू (ICU) वार्ड में शिफ्ट किया गया। यहाँ स्मीमेर अस्पताल के डीन डॉ. दीपक होवले, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. जितेंद्र दर्शन और सीनियर आर.एम.ओ. (Sr. RMO) डॉ. जयेश पटेल के सीधे मार्गदर्शन में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने 20 दिनों तक लगातार मरीज का गहन इलाज और कड़ाई से देखभाल की। डॉक्टरों की इस लंबी लड़ाई के बाद युवक की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।परिजनों ने जताया आभार, अस्पताल प्रबंधन की चौतरफा सराहनावर्तमान में यह 23 वर्षीय युवक पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और अपने पैरों पर चलकर सकुशल घर लौट गया है। अस्पताल के डीन डॉ. दीपक होवले, सुपरिटेंडेंट डॉ. जितेंद्र दर्शन और सीनियर आर.एम.ओ. डॉ. जयेश पटेल सहित पूरी मेडिकल टीम के इस उत्कृष्ट कार्य के लिए मरीज के परिवार ने दिल से आभार व्यक्त किया है। स्मीमेर अस्पताल के डॉक्टरों की इस असाधारण सफलता के चलते सरकारी अस्पताल की चिकित्सा क्षमता और डॉक्टरों के समर्पण की शहर भर में प्रशंसा हो रही है।