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प्रेस विज्ञप्ति: नैनीताल।
- रिपोर्टर- मनोज कुमार
डॉ दीपक कुमार, गणित विभाग, (डीएसबी परिसर नैनीताल) “आज मैं शिक्षक दिवस पर एक बहुत सरल-सी बात से शुरुआत करना चाहता हूँ।
बारिश लगातार बरसती रहती है, लेकिन यदि उसे ग्रहण करने वाली धरती न हो, तो उस बारिश का क्या अर्थ है? ठीक उसी तरह शिक्षक कितना ही ज्ञान क्यों न दे, यदि उसे ग्रहण करने वाला विद्यार्थी न हो, तो उस ज्ञान की सार्थकता अधूरी रह जाती है। इसलिए मैं मानता हूँ कि विद्यार्थी केवल शिक्षक से नहीं सीखता, बल्कि विद्यार्थी ही शिक्षक के अस्तित्व को एक अर्थ देता है।
हम शिक्षक वास्तव में बीज की तरह हैं और हमारे विद्यार्थी उस धरती की तरह, जो हमें पनपने का अवसर देती है। इसलिए आज शिक्षक दिवस पर धन्यवाद केवल शिक्षक को नहीं वरन उन सभी विद्यार्थियों को, जिन्होंने हमें शिक्षक बनने का अवसर दिया।
मेरे विचार से हमारे अपने जीवन के अनुभवों से बड़ा कोई शिक्षक नहीं हो सकता। जो कुछ हम जीवन में देखते हैं, सहते हैं, सीखते हैं और अनुभव करते हैं, वही हमें भीतर से परिपक्व बनाता है। किताबें हमें ज्ञान देती हैं, शिक्षक हमें दिशा देते हैं, लेकिन जीवन के अनुभव हमें स्वयं को समझना सिखाते हैं।
इसीलिए गौतम बुद्ध ने कहा था- ‘अप्प दीपो भव’, अर्थात् ‘अपना दीपक स्वयं बनो।’
क्योंकि जब बाहर का प्रकाश साथ छोड़ दे, तब हमारे अपने अनुभवों का प्रकाश ही हमें रास्ता दिखाता है। इसलिए मनुष्य केवल किसी और का शिष्य नहीं है; वह स्वयं भी एक शिष्य है और कहीं न कहीं अपना शिक्षक भी।
हमारे जीवन से बड़ा कोई शिक्षक नहीं, हमारे अनुभव से बड़ी कोई पाठशाला नहीं, और हमारी गलतियों से बड़ा कोई सबक नहीं। इसलिए जीवन में जो कुछ भी घटता है, उसे केवल घटना मत समझिए। उसे अपना शिक्षक समझिए। अपने अनुभवों को व्यर्थ मत जाने दीजिए; हमारे जीवन की हर घटना, हर सफलता, हर असफलता और हर गलती, एक किताब का पन्ना है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि हम उन पन्नों को पढ़ना सीखें। और शायद यही बात गणित भी हमें सिखाती है। गणित का प्राध्यापक होने के नाते, या यूँ कहें कि गणित का एक शिष्य होने के नाते, मैं यह कह सकता हूँ कि गणित ने मुझे केवल संख्याओं और समीकरणों को समझना नहीं सिखाया, बल्कि जीवन को समझने की दृष्टि भी दी है।
गणित हमें सिखाता है कि हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है, बस हमें सही दृष्टिकोण, धैर्य और प्रयास के साथ उसे खोजने की आवश्यकता होती है। कभी कोई उत्तर तुरंत नहीं मिलता, तो इसका अर्थ यह नहीं कि समाधान है ही नहीं; बल्कि यह संकेत होता है कि हमें अपनी विधि बदलने की आवश्यकता है। और शायद यही जीवन का सबसे बड़ा गणित है, परिस्थितियाँ हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन उनका समाधान खोजने का दृष्टिकोण हमारे हाथ में होता है। इसलिए मेरे लिए गणित केवल एक विषय नहीं है; यह जीवन को देखने, समझने और जीने की एक कला है।
गणित की एक महत्वपूर्ण शाखा ज्यामिति का एक अत्यंत सुंदर विषय कोण हमें यह सिखाता है कि जीवन में हमारा दृष्टिकोण ही बहुत कुछ निर्धारित करता है। कोण बदलते ही दिशा बदल जाती है; ठीक उसी प्रकार जीवन में हमारा दृष्टिकोण बदलते ही परिस्थितियों को देखने और समझने का तरीका भी बदल जाता है।जीवन में भी कई बार समस्या बदलने की जरूरत नहीं होती, अपना दृष्टिकोण बदलने की जरूरत होती है।
गणित की एक अन्य शाखा टोपोलॉजी हमें सिखाती है कि बाहर से अलग दिखाई देने वाली चीजों में भी कोई गहरी समानता हो सकती है। टोपोलॉजी में हम पढ़ते हैं कि कॉफी मग और डोनट देखने में बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं, लेकिन टोपोलॉजी की दृष्टि से उनमें एक महत्वपूर्ण समानता है और वह यह है कि दोनों में एक छिद्र (होल) है। ठीक इसी प्रकार, हम मनुष्यों को देखें तो हम बाहर से एक-दूसरे से अलग दिखाई दे सकते हैं जैसे की हमारी भाषा, वेशभूषा, रूप-रंग और जीवन-शैली अलग हो सकती है। लेकिन भीतर से हम सभी में बहुत-सी समानताएँ हैं। हमारी भावनाएँ, हमारी संवेदनाएँ, हमारी आकांक्षाएँ और हमारे सपने हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं।
आज AI और टेक्नोलॉजी के युग में जानकारी प्राप्त करना पहले से आसान है। लेकिन जानकारी को विवेक, संवेदना और जीवन-मूल्य में बदलने का काम शिक्षक ही करता है।
इसलिए आज मैं अपने सभी विद्यार्थियों से सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ—
शिक्षक दीपक के तरह होता है जो खुद जलकर दूसरे को रोशनी देता है। दीपक का प्रकाश भले ही खुद को न दिखाई दे परंतु उसकी रोशनी आने वाली कई पीढ़ियों को रास्ता दिखाती है। जैसे एक दीपक से दूसरा दीपक जलता है और पहले दीपक की रोशनी कम नहीं होती, वैसे ही एक शिक्षक जब ज्ञान देता है, तो उसका ज्ञान कम नहीं होता; बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ता और फैलता जाता है।”