जिला मुख्यालय मैं
कचड़े से बन रही सड़क जबकि सुपौल मार्केट से पूरब की ओर जाने का दो मुख्य रास्ता एक लोहिया नगर चौक ढाला एवं दूसरा विणा रोड इंजीनियरिंग कॉलेज ढाला यह अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रमाण है जहां विद्या की सबसे बड़ी मंदिर हो वहां नगर परिषद के द्वारा कचरे का ढेर लगा कर विद्या की देवी का सरासर अपमानजनक कार्य कर रही है जबकि सरकार के द्वारा पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन जमीनी स्तर पर देखा जाए तो विभागीय लापरवाही के कारण रोड के साइड मैं यह कचरे का ढेर अपने आप में विभागीय की लापरवाही का दे रहा है प्रमाण वैसे तो सुपौल नगर परिषद को विश्वकर्मा का दर्जा दिया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है सूबे के बाबा भी देख कर हो रहे हैं
नजरअंदाज
सुपौल नगर परिषद ने यह ठान लिया है कि कचड़े से बिना एक पैसे की लागत से सड़क बनाकर पूरे देश में वह एक नजीर पेश करके ही छोड़ेंगे। इसके लिए नप ने सुपौल-वीणा रोड का चयन किया है। सुपौल रेलवे इन्जीनियरिंग कालेज ढ़ाला से वीणा गांव की ओर काफी धीमी गति से कचड़ेवाली यह सड़क बनायी जा रही है। कचड़े से निर्मित यह सड़क देश का पहला ऎसा सड़क होगा जो यदि अगामी दो वषॅ में निर्माण कर लिया गया तो संभवतः देश के चर्चित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इसके उद्घाटन का फीता काट सकते हैं। आगे जो भी हो लेकिन फिलहाल इस कचड़ेवाली सड़क निर्माण के चलते यहां जो बेहिसाब गन्दगी जमा हो गयी है उसके कारण चमगादरों का बसेरा हो गया है। चमगादड़ों की लगातार भागदौड़ के कारण दोपहिया वाहनों का परिचालन खतरनाक एवं जानलेवा सिद्ध हो रहा है।और भी काफी समस्या है लेकिन फ्री का सड़क बनने के लोभ में सारा सुपौल चुपचाप है।