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2014 की महंगाई v/S 2023 की महंगाई और लड़ाई “मैं भी प्रधान मंत्री “

इंडियन टीवी न्यूज अनिल दिनेशवर

सत्ता की गद्दी के लिए सारे पार्टी के जनप्रतिनिधि लगे हुए हैं 2014 में जो माहौल तब के विपक्षी दलों ने महंगाई,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार को लेकर बनाया था और तब के समय एक गीत बहुत प्रसिद्ध हुआ था उसका गाना महंगाई डायन खाए जात है ने इस कदर धूम मचाया था कि लोगों की जुबान में रट गया था और जिस महगाई को लेकर सत्ता हासिल की गई थी उसमें जनता की महंगाई तो कम नहीं हुई लेकिन उन जनप्रतिनिधियों की महंगाई जरूर कम हो गई जो जीत कर सत्ता में बैठ गए,आज उनसे अपेक्षा या सवाल करने की कोशिश की भी जाति है तो वे सीधे जवाब नही देते हैं 2014 में जिस वर्तमान मंत्री स्मृति ईरानी ने गैस सिलेंडर को लेकर महंगाई के नाम से सर पे उठाकर तांडव किया था क्या उसी हिम्मत और दिलेरी से आज 2023 में वर्तमान विपक्ष वैसा ही क्यों नहीं करता है
जनता की आवाज को बुलंद करना विपक्ष की अहम जिम्मेदारी होती है लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है क्या सत्ता में बैठने वाले एक ही सिक्के के दो पहलू हैं या यूं कहें कि एक ही थाली के चट्टे बट्टे है ।
आज प्रत्येक पार्टी के सुप्रीमों की लड़ाई प्रधान मंत्री पद के लिए चल रही है क्या “मैं भी प्रधान मंत्री” की होड़ लगी हुई है दल बदलू और खरीद फरोख्त क्या देश के विकास को बढ़ाता है आज इस माहौल से लड़ेगा कोन?
आज जनता उन लोगों को ढूंढ रही है जो उनकी महंगाई,बेरोजगारी और दिनों दिन बहन बेटी महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के लिए लड़ सकें।
आज जनता अपने आप को असहाय महसूस कर रही है अब समझने और सोचने व मंथन करने वाली बात ये है कि क्या हिटलर शाही चल रही है बलात्कार रुके नहीं,अपराध बढ़ रहे दिनों दिन,महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है ये सवाल सिर्फ सवाल बनकर ही रह गए हैं

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