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मातागुडी, देवगुडी, गोटूल, प्राचीन मृतक स्मारक धरोहर स्थलों के आसपास किया जाएगा वृक्षारोपण

ब्यूरो चीफ मनोज भट्ट
जिला बस्तर छत्तीसगढ़

*मातागुडी, देवगुडी, गोटूल, प्राचीन मृतक स्मारक धरोहर स्थलों के आसपास किया जाएगा वृक्षारोपण*

*मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार लगभग 5 लाख 62 हजार से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य*

*कमिश्नर श्री धावड़े ने संभाग के जिलों के लिए लक्ष्य किया निर्धारित*

जगदलपुर 22 जून 2024/आदिवासी एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों का जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ सेवी-अर्जी स्थलों पर अटूट आस्था रखते हैं। देव-माता गुड़ी स्थल के आसपास वृक्षों को देवता समतुल्य मान्यता है, गुड़ी स्थल पर स्थित पेड़ पौधों को संरक्षित रखा जाता है। इसी भावना के साथ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार बस्तर क्षेत्र के सभी देवगुड़ी, मातागुडी, प्राचीन मृतक स्मारक स्थलों के आसपास लक्ष्य अनुरूप अनिवार्य रूप से वृक्षारोपण करने की कार्ययोजना है। कमिश्नर श्री श्याम धावड़े ने बताया कि संभाग के सातों जिलों में कुल 7055 देवगुड़ी-मातागुड़ी, जारी 3455 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 2607.200 हेक्टेयर रकबा में 5 लाख 62 हजार 500 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस वृक्षारोपण कार्य के लिए जिलों के जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इन देव स्थलों पर फलदार, फुलदार, छायादार पौधे यथा नीम, आम, जामून, करजी, अमलताश व ग्रामवासियों के सुझाव अनुसार पौधों का रोपण विशेष अभियान चलाकर किया जाएगा। वृक्षारोपण के दिन ग्राम प्रमुख, बैगा, सिरहा, पेरमा, मांझी, चालकी, गुनिया, गायता, पुजारी, पटेल, बजनिया, अटपहरिया तथा मान. जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। वृक्षारोपण कार्य वन विभाग के सहयोग से वन महोत्सव कार्यक्रम को 15 जुलाई 2024 तक पौधरोपण कार्य को पूर्ण करवा लिया जाएगा। उन्होंने जिलों के कलेक्टरों को समय- सीमा की बैठक में इसकी सतत समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

ज्ञात हो कि बस्तर संभाग में स्थापित आस्था एवं जीवित परम्पराओं के केंद्र मातागुडी, देवगुड़ी, गोटूल, प्राचीन मृतक स्मारक, सेवा-अर्जी स्थलों को संरक्षण एवं संवर्धन करने के लिए अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 3(1) (5) के तहत् देवी-देवताओं के नाम से ग्राम सभा को 3455 सामुदायिक वनाधिकार पत्र प्रदान किये गये हैं तथा 3600 गैर वन क्षेत्र में स्थित देवगुडी, मातागुडी, प्राचीन मृतक स्मारक एवं गोटूल स्थल को राजस्व अभिलेख में प्रविष्टि किया जा चुका है। कुल 7055 मातागुडी, देवगुडी, गोटूल, प्राचीन मृतक स्मारक के लिये 2607.20 हेक्टेयर (6466 एकड) भूमि राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि कर संरक्षित किया गया है। उक्त स्थलों में वृक्षारोपण किया जाना है, जिसमें बस्तर जिले में 1643 देवगुडी-मातागुड़ी,जारी 999 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 628.81 हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 01 लाख 60 हजार, कोंडागांव जिले में 1410 देवगुड़ी – मातागुड़ी, जारी 1121 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 551.81 हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 01 लाख 40 हजार, कांकेर जिले में 1179 देवगुड़ी – मातागुड़ी, जारी 303 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 329.0हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 85 हजार, नारायणपुर जिले में 860 देवगुड़ी – मातागुड़ी, जारी 110 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 225.21 हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 51 हजार 500, दंतेवाड़ा जिले में 570 देवगुड़ी – मातागुड़ी, जारी 244 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 231.77 हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 51 हजार, बीजापुर जिले में 856 देवगुड़ी – मातागुड़ी, जारी 490 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 385.42 हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 10 हजार और सुकमा जिले में 537 देवगुड़ी – मातागुड़ी, जारी 188 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 255.16 हेक्टेयर रकबा में पौधरोपण हेतु अनुमानित लक्ष्य 65 हजार है। संभाग के सातों जिलों में कुल 7055 देवगुड़ी-मातागुड़ी, जारी 3455 वन अधिकार मान्यता पत्र स्थलों में 2607.200 हेक्टेयर रकबा में 5 लाख 62 हजार 500 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस वृक्षारोपण कार्य के लिए जिलों के जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साथ जिलों के वन मंडलाधिकारी को आवश्यक सहयोग के लिए निर्देशित किया गया है।

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