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जल की महत्त्व को समझने की जरूरत.है

जल की महत्त्व को समझने की जरूरत.है

जल ही जीवन है जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना नहीं की जा सकती,जीवन के सभी कार्यों का निष्पादन करने के लिये जल की आवश्यकता होती है लेकिन जब जब पानी की कमी होती है,मिलता नहीं है तो हाहाकार मच जाता है,खाली मटके फोड़े जाते हैं,नारे लगाए जाते हैं,नेता अनशन पर बैठते हैं,सरकारें व्यवस्था के लिए धन का रोना रोती हैं!जब बरसात आती है,तब उस पानी को सहेजने और मितव्ययिता से उसका उपयोग करने और उसके महत्त्व को समझने की जरूरत नहीं समझी जाती!देश में हर वर्ष पानी की किल्लत होती है कई राज्यों व इलाकों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जाता है!पानी लेते समय जहां पड़ोसियों को भी आपस में लड़ते देखा जा सकता है वहीं रसूखदारों को पानी के टैंकरों द्वारा आपूर्ति के माध्यम से पैसा बनाते हुए भी देखा जा सकता है। सरकारों ने पानी की समस्या का स्थायी समाधान खोजने के प्रयास ईमानदारी से किए हों,ऐसा जमीन पर दिखाई नहीं देता! कभी कारणों का पता लगाने का सही ढंग से प्रयास भी नहीं किया गया,यही वजह है कि न तो शहर की जनसंख्या के अनुपात में जल संग्रहण संरचनाओं का विस्तार होता है और न ही जो है उनका ठीक से रखरखाव और प्रबंधन होता है! ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं,जब देश के कुछ राज्यों के शहरों में जल समस्या का रूप ले ले। रमेश सैनी सहारनपुर

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