ललितपुर व्यूरो रिपोर्ट सुनील शर्मा
कोरोना महामारी से जूझ रहे डॉक्टर और हॉस्पिटल स्टाफ को भारत और प्रदेश सरकार द्वारा प्रथम वरीयता प्रदान करते हुए सबसे सम्मानीय स्थान प्रदान किया जा रहा है मंगर शासन की इस मंशा को यही डॉक्टर और नर्स पलीता लगाने से नहीं चूक रहे हैं
डॉक्टर नर्स और अस्पताल स्टाफ को मरीज और उसकेअटेंडेंट किसी भगवान से कम दर्जा नहीं देते
और जब वही डॉक्टर और नर्स मरीज की दवाई इंजेक्शन ऑक्सीजन आदि समय पर उपलब्ध ना करा कर शराब के नशे में धुत होकर अपनी मस्ती में शाम से झूमने लगे ऐसे में मरीज का ईश्वर ही मालिक है
हालही की एक घटना तालबेहट kovit 19 सेंटर पर डॉक्टर स्टाफ नर्स और अन्य स्टाफ ने शाम से ही जश्न मना कर शराब खोरी और बस्ती की परिणाम यह हुआ कि मरीजों को शाम की दवा शाम के इंजेक्शन और ऑक्सीजन आदि की व्यवस्था समय पर नहीं मिलने के कारण शाम से लेकर अगली सुबह तक मरीज पल-पल मरते और जिंदा होते रहे स्थिति यह रही कि ना तो मरीजों के पास अपनी बात कहने के लिए फोन की व्यवस्था है और ना ही अटेंडेंट को हॉस्पिटल के अंदर जाने की अनुमति ऐसे में मरीज अपनी व्यथा किस्से सुनाता जीते मरते जैसे तैसे रात तो कातिल है अगली सुबह डॉ मुकेश दुबे अपने रूटीन चेकिंग करने के लिए निकले तब मरीजों ने अपनी दास्तां डॉक्टर को सुनाई डॉक्टर दुबे आश्चर्य में डूब गए की ऐसी गंभीर परिस्थितियों में डॉक्टर स्टाफ द्वारा इतना घनघोर अपराध कैसे किया गया क्यों इन मरीजों को समय से दवाई इंजेक्शन आधी नहीं दिए गए तब उन्हें पता लगा कि उनका स्टाफ शाम से ही रंगीनियों में डूब गया था यहां तक की डॉक्टर के साथ नर्स और स्टाफ ने भी ज्यादा शराब पी ली थी जिस कारण से मदहोशी के दौरान उनको यह इस बात का एहसास ही नहीं रहा वह डॉक्टर और नर्स है
डां मुकेश दुवे ने सी एम ओ को लिखे शिकायती पत्र मे डॉ केतन स्वास्थ्य अधिकारी बार डॉ शशांक साहू फामार्सिस्ट मनीश और मोहन एंव नर्स शराव के नशे मे होने के कारण रात्रि पाली मे लगने वाले तीन इंजेक्शन नही लगाये अंटेन्डेट द्वारा वार वार कहा गया
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाकघर के द्वारा फोन पर हुई वार्ता में बताया जिलाधिकारी ए दिनेश कुमार गुप्त घटना से अवगत करा दिया गया उक्त डाक्टर और स्टाफ के खिलाफ शीघ्र अति शीघ्र कानूनी कार्रवाई की जा रही है
यह तो अच्छा हुआ कि कोई बड़ी घटना नहीं हुई लेकिन आम पब्लिक का कहना है ऐसी लापरवाही डॉक्टर स्टाफ के साथ आईपीसी धाराओं के अंतर्गत मुकदमा भी कायम किया जाना चाहिए