परियोजना के एक फ़ैसले ने इंटर कॉलेज ओबरा का स्वरूप बदला, डीएवी की मनमानी फीस के बाद परिसर की आबो हवा को किया जा रहा हरा पेड़ काटकर दूषित
मंडल ब्यूरो चीफ चंद्रजीत सिंह की रिपोर्ट।
ओबरा इंटर कॉलेज परिसर जब से डीएवी के हाथों में गया है तब से डीएवी संस्था अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहा है। लाख आरोपो के बाद भी एक के बाद एक कार्यों से डीएवी प्रशासन अपनी मंशा को उजागर कर रहा। लेकिन ऊंची पहुंच का फायदा उठाकर डीएवी प्रशासन लगातार मनमानी कर रहा। बता दे की कुछ दिनों पहले हरे पेड़ काटने का मामला सामने आया था फिर एक बार दोबारा हरे पेड़ काटने से स्थानीय लोग स्तंभ है। डीएफओ से बात करने पर भी वन अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे डीएवी प्रशासन का मन बढ़ा हुआ है। वहीं परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि इंटर कॉलेज को डीएवी को हैंडओवर कर दिया गया है अब वह जब चाहे जो कर सकते हैं, हमारे बस में कुछ है नहीं। लेकिन पूर्व में पढ़ रहे छात्रों का कहना है कि पढ़ने के दौरान गुरु और शिष्यों ने पर्यावरण हरियाली को लेकर परिसर में पेड़ पौधे लगाए थे। जिससे ओबरा की आबो हवा स्वच्छ हो सके और स्कूल सुंदर दिख सके खुशनुमा माहौल में पढ़ाई का माहौल बना रहता है। हालांकि छात्रों ने कहा सोच सोच का फर्क है। डीएवी की कार्यप्रणाली से पूर्व के छात्र स्तंभ है गरीब तबके की के लिए डीएवी पाठशाला पढ़ने के लिए माफिफ्ट नहीं क्योंकि फीस बहुत ज्यादा है। ओबरा परियोजना के एक फैसले ने देवालय का रूप ही बदलकर रख दिया जिससे पूर्व के साथ निराश तो है ही वही वर्तमान में पढ़ने वाले गरीब छात्रों को भी निराशा हाथ लगी है। डीएवी की महंगी फीस को लेकर भी चर्चा बनी रहती है ओबरा नगर के आसपास कई कैसे गांव के बच्चे हैं जो सस्ती पढ़ाई की वजह से बढ़िया स्कूल में नहीं पढ़ पा रहे हैं। अब ओबरा की पढ़ाई व्यवसायिक हो गई है।