राम बनवास की कथा सुनकर भावबिभोर हुये श्रोता
सोनभद्र समाचार ब्यूरोचीफ नन्दगोपाल पाण्डेय
रावटसगंज तहसील में चतरा ब्लॉक के जलखोरी ग्राम में हनुमान मंदिर पर चल रही मानस यज्ञ एवं श्री राम कथा में पांचवें दिन पर विधिवत पूजन एवं बिद्वान पंडितों द्वारा पारायण किया गया तथा सायं काल श्री राम कथा, कथा वाचीका मानस माधुरी सुनीता पांडे द्वारा माता सीता की विदाई एवं राम वन गमन की कथा का विस्तृत वर्णन किया गया उन्होंने कहा कि राम विवाह के उपरांत महाराज दशरथ के साथ भगवान राम माता सीता एवं चारों भाइयों की पत्नियों के साथ अयोध्या वापस आए और कुछ दिन व्यतीत हो जाने के उपरांत राजा दशरथ एक बार जब शीशे में अपना चेहरा देखते हैं तो कान के समीप सफेद बाल देखकर उनको अपने बुढ़ापे का आभास होता है और उनके द्वारा गुरु एवं पंडितों को बुलाकर भगवान राम के राज्याभिषेक का समय निश्चित कर दिया जाता है यह खबर सुनकर पूरी अयोध्या एवं राजमहल अत्यंत प्रसन्न होता है और राज्याभिषेक की तैयारी शुरू कर दी जाती हैं पूरे अयोध्या को फूल मालाओं से सजाया जाता है परंतु यह बात जब माता कैकई की दासी मंथरा को पता चलता है तो उसको भरत का राजा ना बनना एवं भगवान राम का राज्याभिषेक होना अच्छा नहीं लगता इस पर वह कैकयी से भरत को राजगद्दी हेतु आग्रह करती है की पूर्व में राजा दशरथ द्वारा उसे जो दो बर देने का वचन दिया गया था उसमें प्रथम वर् के रूप में भारत को राजगद्दी एवं दूसरे बर के रूप में भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास मांग लेवे महारानी कैकई द्वारा मंथरा को फटकार लगाई जाती है परंतु जब माता कैकेई को भगवान राम को बचपन में दिया हुआ वर जिसमें उनके लिए 14 वर्ष वन गमन का मांगा गया था याद आता है तो वह कोप भवन में चली जाती हैं और महाराजा दशरथ से दोनों वर् प्राप्त करती है इसके उपरांत अगले दिन भगवान श्री राम अपने समस्त माता एवं पिता का आशीर्वाद लेकर के अपने भ्राता लक्ष्मण एवं माता सीता के साथ वन को चल देते हैं परंतु अयोध्या के सभी नगर वासी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हो जाते हैं और साथ-साथ चल देते हैं शयंकाल तमसा नदी के किनारे भगवान राम समस्त लोगों से विश्राम हेतु कहते हैं और रात्रि में उन सभी नगर वासियों को सोते हुए वहीं छोड़कर भगवान राम वन को चले जाते हैं तथा गंगा नदी के किनारे पहुंचकर केवट से नदी पार करने का आग्रह करते हैं परंतु केवट द्वारा अनुरोध के उपरांत केवट के पाव पखारने के उपरांत केवट द्वारा उन्हें अपने नाव से गंगा पार किया जाता है lइस अवसर पर कृष्ण कुमार .द्विवेदी, विजय राम पाठक, श्रीकांत पाठक,विजेंद्र नाथ तिवारी,रामपति पाठक, नारायण प्रसाद पांडे,नाम देव पांडे, पुजारी राजेंद्र पाठक एवं कल्पना पाठक,दिलीप सिंह,जयचंद सिंह,कृष्ण कुमार सिंह गोपी,गोविंद,सुदामा, जयशंकर,सूर्य नारायण सिंह प्रधान, सुरेश पाठक जितेंद्र सिंह,राजेश पटेल,रामप्रसाद सुभाष पाठक, वीरेंद्र पटेल, महेंद्र पटेल, रामकुमार पटेल, राजकुमार सिंह, गोविंद पटेलसमेत सैकड़ो लोग उपस्थित रहे