बारिपदा
ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi के बारिपदा दौरे को लेकर विभिन्न वर्गों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान जिले में 39 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया तथा मयूरभंज के विकास के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। हालांकि, आरक्षण नीति और मीडिया प्रबंधन को लेकर कई सवाल भी सामने आए हैं।
कुछ सामाजिक संगठनों और सामान्य वर्ग के लोगों का आरोप है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण बढ़ाने पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के युवाओं की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। आलोचकों का कहना है कि रोजगार और शिक्षा में अवसर केवल जाति आधारित नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।विरोध करने वाले वर्गों का तर्क है कि सामान्य वर्ग के कई योग्य छात्र उच्च अंक प्राप्त करने के बावजूद रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित रह जाते हैं। उनका मानना है कि सरकार को आर्थिक रूप से पिछड़े सभी वर्गों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।दूसरी ओर मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी नाराजगी सामने आई। जानकारी के अनुसार पहले पत्रकारों को बारिपदा कॉलेज मैदान में बुलाया गया, बाद में उन्हें पी.आर.एम. मेडिकल कॉलेज परिसर भेजा गया। भीषण गर्मी के बीच घंटों इंतजार करने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया को संबोधित किया, लेकिन पत्रकारों को कोई प्रश्न पूछने का अवसर नहीं दिया गया।स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि यदि उन्हें प्रश्न पूछने की अनुमति मिलती तो वे मयूरभंज जिले से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सड़क, सिंचाई तथा अन्य जनहित के मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष रख सकते थे। पत्रकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया के सवालों का जवाब देना सरकार की जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है।हालांकि सरकार का कहना है कि मयूरभंज जिले के समग्र विकास के लिए अनेक योजनाएं लागू की जा रही हैं और राज्य सरकार क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं तथा रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दे रही है।मुख्यमंत्री के इस एकदिवसीय दौरे में जिले के सभी प्रमुख जनप्रतिनिधि, विधायक एवं सांसद उपस्थित रहे। इसके बावजूद आरक्षण नीति और पत्रकारों को संवाद का अवसर न मिलने जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों में चर्चा जारी है।