अवर अभियंता के पास नहीं है पुलिया के निरीक्षण करने के लिए समय ।।
अवर अभियंता और ठेकेदार के बीच छलकते हैं जाम ।।
पूर्व में रहे रामगंगा नहर के अवर अभियंता ने ठेकेदार को दी है विभाग से रुपए निकालने का गुरु ज्ञान ।।
जनपद में निचली गंगा नहर विभाग अपने आप में एक चर्चा का विभाग है जहां आए दिन विकास कार्यों को लेकर ऑन लाइन तथा ऑफलाइन के माध्यम से पंजीकृत ठेकेदारों को ठेके पर काम देकर विकास कार्य करवाया जाता है परंतु ऑफलाइन तथा ऑनलाइन टेंडर होने के बाद ठेकेदार द्वारा अपनी मनमर्जी के मुताबिक विकास कार्य किया जाता है वही गमरी ग्राम सभा में लगभग 10 लाख रुपए की कीमत से तैयार की जा रही पुलिया में टोटल घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है वही अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा ने अंजलि कंट्रक्शन कंपनी को इस पुलिया का निर्माण कराने का ठेका दिया था ठेका होने के बाद ठेकेदार संतोष प्रजापति द्वारा पुलिया निर्माण कार्य में 12-1 का मसाला और तीन नंबर के ईट का प्रयोग किया जा रहा है तथा अवर अभियंता भी इस मामले में मौन धारण किए हुए हैं जानकारी के अनुसार अवर अभियंता सुरेश सचान को इस मामले की जानकारी दी गई परंतु उन्होंने साफ तौर पर कहते हुए बताया कि उनके पास अभी समय नहीं है कि वह पुलिया का निरीक्षण कर सकें ठेकेदार द्वारा जिस तरीके से भी पुलिया का निर्माण किया जा रहा है उसकी गुणवत्ता यदि देखी जाए तो लगभग 1000000 रुपए की कीमत से तैयार होने वाली पुलिया कितने दिन चलेगी यह तो भगवान भरोसे ही है वही विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रामगंगा नहर में पूर्व में रहे अमित कटियार जेई के साथ ठेकेदार संतोष प्रजापति ठेकेदार इतना ज्यादा लगाओ था कि पूर्व में रहे जेई अमित कटियार के कमरे में होती था दिन-रात बैठक और छलकते थे जाम और ठेकेदार तथा जेई के बीच मनाते थे रंगरलिया परंतु कुछ दिनों बाद जेई के उसी कमरे में अचानक ज जेई की मृत्यु हो जाने के बाद वहां का आवागमन बंद हो गया और ठेकेदार अपने अन्य कार्यों में बिजी हो गया परंतु वही रवैया अब फिर शुरू हो गया है ठेकेदारी का काम मिलने के बाद जेई तथा अन्य अधिकारियों को कैसे खुश करना है यह अंजली कांटेक्ट सन कंपनी के मालिक को बखूबी पता है और किस तरीके घटिया सामग्री लगाकर विभाग से पैसा निकाला जाता है इस मामले में तो ठेकेदार ने महारत हासिल कर रखी है परंतु सवाल यह उठता है कि जब निचली गंगा नहर के अधिकारियों द्वारा कार्य दिया जाता है तो फिर उसकी गुणवत्ता क्यों नहीं परखी जाती है क्या सरकार द्वारा दिया गया पैसा विकास कार्य में पानी की तरीके बहया जाता है या फिर पैसा पास कराने का भी एक अपना तरीका है या फिर कमीशन के चक्कर में नहीं हो पता अच्छा निर्माण यह तो जांच होने पर ही मालूम पड़ेगा की ।।
जिला संवाददाता:- दीपक मिश्रा रिपोर्ट, राम जी कैमरा मैंन के साथ इंडियन टीवी न्यूज चैनल ।