ब्यूरो चीफ मनोज भट्ट
ग्रामीणों ने साफ आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव और पूर्व सरपंच ने करीब ₹4.50 लाख रुपये दो साल पहले निकाल लिए, लेकिन आज तक जमीनी स्तर पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। पूरा काम केवल कागजों पर विकास दिखा दिया गया और राशि पूरी तरह हड़प ली गई।
गांव के लोग रोजाना पंचायत भवन और उसके आसपास देखते हैं, लेकिन न तो कोई दीवार बनी है और न ही निर्माण कार्य का कोई निशान। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है और पंचायत फंड का खुलेआम दुरुपयोग किया गया है।
ग्रामीणों में आक्रोश इस बात को लेकर है कि इतने बड़े घोटाले के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक जांच शुरू नहीं की। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले को नजरअंदाज किया गया तो भ्रष्टाचारियों का हौसला और भी बढ़ेगा।
गांव के लोग अब सामूहिक रूप से मांग कर रहे हैं कि तत्काल ग्राम स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी सचिव पर कठोर दंड दिया जाए। वे चाहते हैं कि जांच में जिला स्तर के अधिकारी भी शामिल हों, ताकि सच्चाई दबाई न जा सके।
ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई ही भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े पर रोक लगा सकती है और ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन पर दोबारा कायम कर सकती है।