रिपोर्ट: जरीना खातुन ब्यूरो चीफ बांदा
बांदा|बांदा जिले में आंगनबाड़ी कार्यकत्री के पद के लिए महिला चयन होना था लेकिन उसमें वरीयता दी गई थी कि महिला अगर बेवा या फिर गरीब है तो उसको पहले वरीयता में रखा जाएगा लेकिन बाल विकास विभाग ने नियम को ताक में रखते हुए एक अमीर घराने की महिला का चयन कर दिया और यही नहीं जो भी आवेदन आए थे उनमें पहले वरीयता बेवा की थी लेकिन बेवा महिला का न करके विभाग में नियम को दरकिनार करते हुए अपने नियम को चलाते हुए सीधे अमीर महिला का चयन कर दिया जिसको लेकर बेवा महिला डीएम के यहां शिकायत कर जांच करवाने के लिए गुहार लगाई है। मामला शहर के मोहल्ला छाबीतालाब का है जहां की रहने वाली पूनम ने जिला अधिकारी अमित आसेरी को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके पति का देहांत पहले हो गया था और मेरे बच्चे हैं जिनके भरण पोषण के लिए हमे बहुत मेहनत करनी पड़ती है लेकिन कुछ माह पहले बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के पद के लिए चयन होना था जिसके लिए वरीयता सरकार द्वारा तय किया गया था कि प्रथम वरीयता में विधवा और गरीब महिला का होना तय किया गया था जिसको देखते हुए परियोजना विभाग द्वारा नियम को ताक में रखते हुए ऐसी महिला का चयन किय जिसके पास खुद शहर के अंदर एक शानदार मकान और परिवार में कारोबारी भी है और यही नहीं कूट रचित तरीके से अपना बी पी एल राशन कार्ड भी बनवा लिया और विभाग के अधिकारियों से साठ गांठ करके यू अमीर महिला ने अपना चयन करवा लिया है और विधवा महिला अपने चयन न होने से जांच के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है। जबकि इस पद के चयन के लिए कुल 9 आवेदन आए थे जिनमें सबसे पहले वरीयता में शिकायत करता का था लेकिन विभाग द्वारा नियम को ताक में रखते हुए एक अमीर महिला एकता गुप्ता का चयन कर दिया है।